चीनी मिल के पास आयोजित बैठक में मौजूद सदस्य।
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जींद। चीनी मिल के सामने लंगर पर किसान व मजदूर संगठनों की संयुक्त बैठक सीटू जिला प्रधान सतबीर खरल की अध्यक्षता में हुई। इसमें संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर 26 नवंबर को आंदोलन की वर्षगांठ पर किसान व मजदूरों की दिल्ली के बॉर्डर पर ज्यादा से ज्यादा लामबंदी करने का निर्णय लिया गया।
बैठक में किसान सभा के जिला प्रधान रोहताश नगूरां, सीटू राज्य उपाध्यक्ष कामरेड रमेश चंद्र, जिला सचिव कपूर सिंह, संदीप जाजवान, पवन कुमार व राकेश खटकड़ भी मौजूद रहे। यहां रमेश चंद्र ने कहा कि किसान आंदोलन के दौरान 700 अन्नदाता मौत का ग्रास बने हैं। अहंकारी और किसान व मजदूर विरोधी भाजपा सरकार को कृषि कानून वापस लेने की घोषणा करनी पड़ी। लेकिन देश के किसानों व मजदूरों का कहना है कि इन कानूनों को संसद द्वारा संवैधानिक तरीके से रद्द करवाया जाए। इसके अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण सवाल अभी बाकी हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गारंटी, बिजली विधेयक की वापसी, आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस करवाना, आंदोलन के दौरान मरे किसानों के परिवारों की आजीविका की सरकारी व्यवस्था, लखीमपुर खीरी में पांच किसानों को कुचलकर मारने के दोषी मंत्री को हटवाने सहित अन्य मांगें पूरी की जाएं। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन एक ऐतिहासिक जीत की ओर अग्रसर है। लेकिन जब तक तमाम मसलों पर सरकार बात कर उनका समाधान नहीं करती, यह आंदोलन जारी रहेगा। किसानों के साथ मजदूरों ने भी एकजुटता दिखाते हुए 26 नवंबर को भारी संख्या में दिल्ली के बॉर्डर पर पहुंचने का निर्णय लिया है। वहीं 24 नवंबर को चौधरी छोटूराम की जयंती पर किसान और मजदूर संघर्ष दिवस मनाया जाएगा। 26 नवंबर को दिल्ली बॉर्डर पर पहुंचने के बाद 29 नवंबर को ट्रैक्टरों द्वारा संसद मार्च किया जाएगा।