रणधीर सिंह को सलामी देते किसान। अमर उजाला
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जींद। टीकरी बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन में वीरवार रात छापड़ा गांव निवासी 49 वर्षीय किसान रणधीर सिंह की मौत हो गई। इसके शुक्रवार को रणधीर सिंह का शव गांव में करीब दो किलोमीटर लंबे काफिले के साथ लाया गया। इस दौरान रणधीर सिंह जिंदाबाद व इंकलाब जिंदाबाद के नारों से छापड़ा गूंज उठा। रणधीर सिंह के शव को भारतीय किसान यूनियन के झंडे में लपेट कर लाया गया। वहीं अंतिम संस्कार के बाद यह झंडा रणधीर सिंह बेटे को सौंप दिया गया।
ग्रामीणों ने बताया कि रणधीर सिंह करीब एक महीने से टीकरी बॉर्डर पर आंदोलन में शामिल था। बीच में करीब दो सप्ताह पहले कुछ दिन के लिए घर आए थे, करीब एक सप्ताह पहले वापस टीकरी बॉर्डर पर चला गया था। अब रणधीर सिंह को शनिवार को घर आना था, लेकिन इससे पहले शुक्रवार को उनका शव ही गांव पहुंचा। ग्रामीणों के अनुसार रणधीर सिंह दो एकड़ की खेती कर अपने परिवार को पाल रहे थे। उनके दो बेटे हैं।
दिया जाए शहीद का दर्जा व आर्थिक मदद
किसान रणधीर सिंह को सरकार द्वारा शहीद का दर्जा देकर आर्थिक मदद दी जाए। साथ ही सरकार को तीनों कानून वापस लेने चाहिए, जिसके लिए सैकड़ों किसान अपने प्राणों की आहुति दे चुके हैं।
- कैप्टन भूपेंद्र जागलान, सदस्य, संयुक्त किसान मोर्चा
किसान रणधीर सिंह के बेटे को भाकियू का झंडा सौंपते संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य। - फोटो : Jind