टीकरी बॉर्डर से लगभग दो माह बाद लौटे चुहड़पुर गांव निवासी 58 वर्षीय रोशन सिंह की शनिवार को हृदय गति रुकने से मौत हो गई। रविवार को रोशन सिंह का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें आसपास के गांवों के सैकड़ों किसानों ने पहुंचकर श्रद्धांजलि दी।
रोशन सिंह के शव पर भाकियू का झंडा रखा गया। अंतिम यात्रा में किसान नेताओं तथा ग्रामीणों ने किसान यूनियन जिंदाबाद तथा रोशन सिंह अमर रहे के नारे लगाए। किसानों ने कहा कि इस आंदोलन में कई लोगों की जान जा चुकी है। आंदोलन की शुरुआत से ही रोशन टीकरी बॉर्डर पर पहुंच गया था। अचानक शनिवार को सीने में दर्द होने पर वह गांव लौट आया था। उसकी रात को हृदय गति रुकने से मौत हो गई। इस अवसर पर वेदप्रकाश बांगड़, मास्टर कपूर सिंह, सुरेश नरवाल, धर्मपाल बांगड़, राजा बांगड़, सुशील नरवाल, कुलदीप, नरवाल, पंच अनिल कुमार, सत्यवान सरपंच और सोनू खटकड़ भी मौजूद रहे।
मृतक के परिवार के सदस्य को नौकरी दे सरकार
किसान नेता गुरुदेव सिंह ने कहा कि रोशन सिंह ने किसानों के हकों के लिए किए जा रहे आंदोलन में अपनी जान गंवाई है। किसान समाज उनकी इस कुर्बानी को याद रखेगा। उन्होंने कहा कि सरकार किसान आंदोलन में अकाल मौत का ग्रास हुए किसानों को शहीद का दर्जा दे और उसके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दे।
मृतक किसान रोशन सिंह की अंतिम विदाई में शामिल लोग। संवाद - फोटो : Jind