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Jind News: आजादी के 79 साल बाद भी समस्याओं की गुलामी में जींद

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फोटो 14जेएनडी28-रोहतक रोड पर बारिश के बाद गली में भरा पानी। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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जींद। देश को आजाद हुए 79 वर्ष हो चुके हैं। इन वर्षों में जींद शहर ने भी विकास की लंबी यात्रा तय की है। शहर की सीमाओं का विस्तार हुआ, नई कालोनियां बसीं, सड़कों का नेटवर्क बढ़ा और कई बड़े विकास प्रोजेक्ट धरातल पर उतरे। बदलते समय के साथ शहर की तस्वीर काफी बदली है इसके बावजूद शहरवासियों की रोजमर्रा की जिंदगी कुछ ऐसी पुरानी समस्याओं से अब भी जकड़ी हुई है जिनसे आजादी नहीं मिली।
बाजारों में पार्किंग का अभाव है। बारिश में आउटर कॉलोनियों के साथ अर्बन एस्टेट, हाउसिंग बोर्ड, शिव कॉलोनी और श्याम नगर जैसे क्षेत्रों में जलभराव हो जाता है। सड़कों पर आवारा पशुओं का खतरा, जींद-सफीदों व रोहतक रोड की बदहाली भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा रही है। दूसरी ओर, शहर की 30 से अधिक कॉलोनियां आज भी नियमित पेयजल आपूर्ति का इंतजार कर रही हैं। स्वतंत्रता दिवस पर शहरवासियों को उम्मीद है कि विकास की अगली मंजिल इन समस्याओं समस्याओं से स्थायी आजादी दिलाएगी।
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पार्किंग की गुलामी : बाजारों में सड़क ही बनी वाहनों की जगह
बाजारों में व्यवस्थित पार्किंग की सुविधा आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। खरीदारी के लिए आने वाले लोगों को मजबूरी में सड़क किनारे वाहन खड़े करने पड़ते हैं। इससे बाजारों में जाम की स्थिति बनती है और पैदल चलने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। शहर में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन इसके अनुपात में पार्किंग स्थलों का विकास नहीं हुआ। व्यस्त बाजारों में समस्या और गंभीर हो जाती है। व्यापारियों का कहना है कि यदि बाजारों के आसपास स्थायी पार्किंग की व्यवस्था विकसित की जाए तो यातायात सुचारु होने के साथ ग्राहकों को भी राहत मिलेगी। विकास के इतने वर्षों बाद भी पार्किंग की समस्या का बने रहना शहर की बड़ी चुनौती है।

बारिश की मार : कॉलोनियां जलभराव से परेशान
बारिश में जींद के कई इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आ जाती है। आउटर कॉलोनियों के अलावा अर्बन एस्टेट की गलियों, हाउसिंग बोर्ड, शिव कालोनी और श्याम नगर सहित कई क्षेत्रों में पानी जमा हो जाता है। कई जगहों पर बारिश का पानी घंटों तक सड़कों और गलियों में जमा रहता है। कई स्थानों पर बारिश का पानी लंबे समय तक नहीं निकलता। इससे घरों से निकलने वाले लोगों, स्कूली बच्चों और वाहन चालकों को परेशानी होती है। लोगों का कहना है कि शहर के विकास के साथ जल निकासी व्यवस्था को भी मजबूत किया जाना चाहिए था। नालों की सफाई और स्थायी ड्रेनेज व्यवस्था होने पर ही हर बारिश में पैदा होने वाली इस समस्या से शहर को मुक्ति मिल सकती है।

सड़कों पर आवारा पशु : योजनाएं बनीं पर समस्या नहीं खत्म हुई
आवारा पशुओं की समस्या भी जींद शहर की पुरानी समस्याओं में शामिल है। मुख्य सड़कों, बाजारों और गलियों में आए दिन पशुओं के झुंड दिखाई देते हैं। कई बार पशु सड़क के बीच बैठ जाते हैं जिससे यातायात प्रभावित होता है और दुर्घटना का खतरा बना रहता है। नगर परिषद की ओर से समय-समय पर पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में भेजने की योजनाएं बनाई जाती हैं, लेकिन स्थायी व्यवस्था नहीं बन पाई। शहरवासियों का कहना है कि केवल अभियान चलाने से समस्या खत्म नहीं होगी। पशुओं को पकड़ने, रखने और नियमित निगरानी की प्रभावी व्यवस्था बनाकर ही शहर को इस समस्या से आजादी दिलाई जा सकती है।

मुख्य सड़कें बदहाल : सफीदों रोड और रोहतक रोड को सुधार का इंतजार
शहर के चारों तरफ कई सड़कें बेहतर हुई हैं, लेकिन जींद-सफीदों मार्ग लंबे समय से बदहाल है। इसके निर्माण की प्रक्रिया दस्तावेजों में आगे बढ़ने की बात कही जाती रही है, लेकिन फाइलों के फेर से बाहर निकलकर इसका लाभ लोगों को नहीं मिल पाया। शहर के बीच रोहतक रोड की हालत भी खराब है। सड़क पर गड्ढे और जलभराव राहगीरों और वाहन चालकों की परेशानी बढ़ाते हैं। व्यापारियों की ओर से कई बार सड़क सुधार की मांग उठाई जा चुकी है।
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पेयजल संकट : 30 से अधिक कॉलोनीवासी अब भी इंतजार में
जींद शहर की 30 से अधिक कालोनियों में अभी तक नियमित पेयजल सुविधा नहीं है। इन क्षेत्रों में लोग सबमर्सिबल के सहारे पानी की जरूरत पूरी कर रहे हैं। गर्मी में समस्या और बढ़ जाती है। शहर के विकास और विस्तार के बावजूद इन कालोनियों तक नियमित पेयजल आपूर्ति नहीं पहुंच पाना बड़ी चुनौती है। हालांकि भाखड़ा का पानी शहर तक पहुंचने और बडौदी जलघर परियोजना के पूरा होने से लोगों को अब राहत की उम्मीद है।

फोटो 14जेएनडी28-रोहतक रोड पर बारिश के बाद गली में भरा पानी। संवाद

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