जींद। गुरुग्राम और नूंह जिलों में बिजली आपूर्ति के लिए सरकारी व्यवस्था के समानांतर निजी कंपनी को लाइसेंस देने के विरोध में बिजली कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है।
हरियाणा पावर इंजीनियर एवं कर्मचारी साझा मोर्चा के प्रदेशव्यापी आंदोलन के दूसरे चरण के तहत बुधवार को जींद सर्किल के कर्मचारियों ने पावर-11 कंपनी को लाइसेंस देने के विरोध में प्रति जलाकर रोष प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने सरकार से लाइसेंस वापस लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि फैसला नहीं बदला गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
इंजीनियर विकास मलिक ने बताया कि प्रदेशभर के करीब 45 हजार कच्चे और पक्के कर्मचारी और फोरमैन, जेई, एसडीओ, एक्सईएन और एसई स्तर तक के अधिकारी 22, 23 और 24 अक्तूबर तक हड़ताल में शामिल होंगे। कर्मचारियों ने बुधवार रात 10 बजे से हड़ताल शुरू करने की घोषणा के अनुरूप आंदोलन में भागीदारी जताई। कर्मचारियों ने प्रस्तावित प्रदेशव्यापी कलम छोड़ हड़ताल का समर्थन किया।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने कहा कि बिजली व्यवस्था का निजीकरण उपभोक्ताओं के हित में नहीं है। निजी हाथों में व्यवस्था जाने से बिजली की दरें बढ़ने की आशंका है, जिसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा। उन्होंने सरकार से अपने वादे पूरे करने और कंपनी को दिया गया लाइसेंस वापस लेने की मांग की।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया तो आंदोलन तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बिजली व्यवस्था के निजीकरण का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। इस अवसर पर इंजीनियर अमित सिंह, अनिल पूनिया, धर्मबीर भंभेवा, सीताराम पांचाल, सुनील छाछिया, जोगिंदर अलेवा, नरेंद्र पूनिया, जेएसई, राजेश शर्मा, पूनम देवी, मोनिका, भारत भूषण, मनोज कुमार, अमित कुमार मौजूद रहे।