जुलाना। करसोला गांव में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और बेटियों की उपलब्धियां गांव की नई पहचान बनकर उभरी हैं। कभी ग्रामीण समाज में सीमित भूमिका तक रहने वाली महिलाएं आज जनप्रतिनिधित्व, शिक्षा, स्वास्थ्य और निजी क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल कर रही हैं।
गांव की 17 सदस्यीय ग्राम सभा में आठ महिलाएं सदस्य हैं जो स्थानीय विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनहित से जुड़े निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभात रही हैं। जिला परिषद और ब्लॉक समिति जैसे महत्वपूर्ण जनप्रतिनिधि पदों पर भी गांव की महिलाएं सक्रिय रूप से भागीदारी निभा रही हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में भी करसोला की बेटियां लगातार नई ऊंचाइयां छू रही हैं। गांव की बेटी भावना शर्मा ने कॉमर्स संकाय में जिला स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त कर गांव का नाम रोशन किया। कई बेटियां एमबीबीएस जैसे प्रतिष्ठित पाठ्यक्रम पूरा कर देश के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में सेवाएं दे रही हैं। वहीं इशिता लाठर निजी क्षेत्र में अपनी प्रतिभा के दम पर बेंगलुरु में 52 लाख रुपये वार्षिक पैकेज पर कार्यरत हैं जो गांव की नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा और जागरूकता बढ़ने से बेटियों के प्रति सोच में सकारात्मक बदलाव आया है। अब परिवार बेटियों को उच्च शिक्षा और करियर के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं जिसका असर उनकी उपलब्धियों में साफ दिखाई दे रहा है।
गांव की महिलाओं और बेटियों की सफलताएं केवल व्यक्तिगत उपलब्धियां नहीं हैं, बल्कि यह ग्रामीण समाज में बदलती सोच का प्रतीक भी हैं। महिला नेतृत्व, उच्च शिक्षा और आत्मनिर्भरता के कारण करसोला आज क्षेत्र में नई सोच, समान अवसर और सामाजिक बदलाव का प्रेरक उदाहरण बनकर उभर रहा है। गांव की बेटियां अपनी मेहनत और प्रतिभा से न केवल परिवार बल्कि पूरे गांव का नाम देशभर में रोशन कर रही हैं
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करसोला की महिलाएं आज हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। जनप्रतिनिधित्व में बढ़ती भागीदारी से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है और वे गांव के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
- सुषमा लाठर, जिला पार्षद
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गांव की बेटियों की उपलब्धियां पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक हैं। शिक्षा और अवसर मिलने पर बेटियां किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकती हैं जिसका उदाहरण करसोला में देखने को मिल रहा है। -
पूनम प्रजापत, ब्लॉक समिति सदस्य
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समय के साथ गांव में बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है। आज बेटियां शिक्षा, रोजगार और नेतृत्व के क्षेत्र में आगे बढ़कर परिवार और गांव दोनों का नाम रोशन कर रही हैं। बेटियां किसी भी क्षेत्र में अब पीछे नहीं हैं।
-डॉ. वंदना लाठर
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करसोला की पहचान अब केवल खेती तक सीमित नहीं रही। यहां की बेटियां डॉक्टर, पेशेवर और जनप्रतिनिधि बनकर नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का कार्य कर रही हैं। यह बदलाव गांव के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है।
- जितेंद्र गिल।
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गांव में महिलाओं की भागीदारी इस बात को साबित करती है कि गांव की महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। महिलाएं गांव के विकास में अहम योगदान दे रही हैं।
- मुखत्यार सिंह, ग्रामीण।
12 जुलाना 02: सुषमा।
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