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वीसी के औचक निरीक्षण से तिलमिलाए बीएड कॉलेज प्रबंधक

Wed, 08 Feb 2017 12:19 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, जींद
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सीआरएसयू में मीटिंग करते बीएड कॉलेज संचालक। - फोटो : jind
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प्रदेश में बीएड कॉलेजों पर की जा रही सख्ती के विरोध में मंगलवार को चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय में दिनभर हंगामा रहा। प्रदेशभर के बीएड कॉलेज संचालक यहां एकत्र हुए और अधिकारियों से कई दौर में अलग-अलग करीब एक घंटे तक बातचीत की। इस दौरान कॉलेज संचालकों ने कुलपति मेजर जनरल डॉ. रणजीत सिंह से भी बातचीत की, लेकिन कोई फैसला नहीं हो सका। ऐसे में कॉलेज संचालकों ने 13 फरवरी तक बीएड कॉलेज बंद रखने और 14 फरवरी को विश्वविद्यालय में फिर से मीटिंग करने का फैसला लिया। 
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गौरतलब है कि विवि के कुलपति मेजर जनरल डॉ. रणजीत सिंह ने पिछले दिनों बीएड कॉलेजों में चल रही नॉन अटेंडिंग व्यवस्था के खिलाफ अभियान चलाया था। इसके बाद विवि की चार टीमों ने अलग-अलग निरीक्षण किया। इससे पहले, कुरुक्षेत्र जिले के दो बीएड कॉलेजों को नियम पूरे नहीं करने पर बंद कर दिया था। इसी कड़ी में सोमवार को भी वीसी मेजर जनरल डॉ. रणजीत सिंह ने जींद व रोहतक जिले के 14 बीएड कॉलेजों का निरीक्षण किया। इसमें 11 कॉलेजों में नाममात्र के विद्यार्थी मिले। इस कार्रवाई के विरोध में प्रदेश के करीब 250 बीएड कॉलेजों के प्रबंधक विवि में एकत्र हुए और प्रशासन के फैसले पर विरोध जताया। इस दौरान अधिकारियों से कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन अधिकारियों ने कहा कि नॉन अटेंडिंग कक्षाएं नहीं चलने देंगे। इस पर कुछ बीएड कॉलेजों ने इस सत्र के लिए राहत मांगी, लेकिन विवि के रजिस्ट्रार राजबीर सिंह मोर व डीन ऑफ कॉलेज डॉ. एसके सोलंकी ने साफ शब्दों में नॉन अटेंडिंग कक्षाएं नहीं चलने देने की बात कही।

क्या है नॉन अटेंडिंग
दरअसल इस सत्र में प्रदेश भर के 452 बीएड कॉलेजों में करीब 40 हजार विद्यार्थियों का दाखिला हुआ है। इनमें से 16170 विद्यार्थी बिहार सहित अन्य राज्यों के हैं, जो कक्षाएं नहीं लगाते। विवि अधिकारियों का आरोप है कि इसकी एवज में कॉलेज प्रबंधन विद्यार्थियों से 15 से 20 हजार रुपये वसूलते हैं। इतने पैसे भरने के बाद विद्यार्थी को कॉलेज में कक्षाएं लगाने से छूट मिल जाती है। विवि अधिकारियों के अनुसार, जांच में पाया गया है कि कुछ कॉलेज तो प्रैक्टीकल दिए बिना महज 1500 रुपये में परीक्षा करवा देते हैं।
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कॉलेजों का पक्ष : नहीं हो औचक निरीक्षण
औचक निरीक्षण एक तानाशाही फैसला है। उस दिन कॉलेज की कोई अलग व्यवस्था हो सकती है। प्राचार्य छुट्टी पर हो सकता है। किसी कारणवश कॉलेज बंद भी हो सकता है। कुलपति इसी आधार पर फैसला कर लेते हैं। ऐसे में निरीक्षण से पहले कॉलेजों को सूचना दी जाए। जो कॉलेज नॉन अटेंडिंग चलते हैं या सुविधाएं नहीं देते, उन्हें बेशक बंद कर दिया जाए। कुलपति महज ढाई मिनट कॉलेज में रुकते हैं और सिर्फ दीवार देखकर निरीक्षण कर लेते हैं। बीएड कॉलेजों पर दबाव बनाया जा रहा है। देश भर में इस प्रकार के औचक निरीक्षण का कोई प्रावधान नहीं है।
- एसपी आर्य, प्रधान, बीएड कॉलेज प्रबंधक समिति

विवि का पक्ष : नहीं चलेंगी दुकानें
कुछ लोगों ने बीएड कॉलेजों के नाम पर दुकानें खोल रखी हैं। मंगलवार को जो कुछ हुआ, इसकी शिकायत राज्यपाल और मुख्यमंत्री को की जाएगी। नॉन अटेंडिंग कक्षाएं नहीं चलने दी जाएंगी। कक्षा में 40 प्रतिशत बच्चे तो कॉलेज दिखाएं। कई कॉलेजों में तो 100 में से महज पांच-छह बच्चे मिलते हैं। फिलहाल इस बार का औचक निरीक्षण हो चुका है। अगले तीन महीने में फिर से यह अभियान शुरू किया जाएगा। पूरी कार्रवाई शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए की जा रही है। फीस से संबंधित कुछ मुद्दे कॉलेजों ने उठाए हैं, उनकी जांच की जाएगी।
-मेजर जनरल डॉ. रणजीत सिंह, कुलपति, सीआरएसयू

बीएड कॉलेजों से वसूली कर रहा है विवि प्रशासन
बीएड कॉलेजों के प्रबंधकों की समिति के प्रधान एसपी आर्य ने बताया कि काउंसिलिंग की फीस कहीं भी 500 रुपये से अधिक नहीं ली जाती, लेकिन यहां तीन हजार रुपये फीस ली जा रही है। परीक्षा फीस के लिए कुरुक्षेत्र विवि 1860 रुपये लेता था, लेकिन यहां फीस 4090 रुपये है। कॉलेज की निरंतरता फीस पहले 25 हजार रुपये वार्षिक होती थी, जो अब एक लाख रुपये ली जा रही है। इस तरह से बीएड कॉलेजों को प्रताड़ित किया जा रहा है।

रजिस्ट्रार बोले मेरा कॉलेज भी होता तो होती कार्रवाई
अधिकारियों से बातचीत के दौरान कॉलेज संचालकों ने माना कि उनकी भी कुछ खामियां हैं, लेकिन उन्हें इस सत्र के लिए मौका दिया जाए। इस पर रजिस्ट्रार राजबीर मोर ने कहा कि यदि मेरा कॉलेज भी होता तो कार्रवाई की जाती।’ वहीं दिन भर विवि में हंगामा रहा, लेकिन अधिकारियों से कई दौर में अलग-अलग करीब एक घंटे तक बातचीत हुई। इस दौरान कॉलेज संचालकों ने कुलपति मेजर जनरल डॉ. रणजीत सिंह से भी बातचीत की, लेकिन कोई फैसला नहीं हो सका।

नहीं चलेगा फर्जीवाड़ा
बीएड कॉलेजों फर्जीवाड़ा नहीं चलेगा। यह साफ शब्दों में संचालकों को बता दिया गया है। हां फीस सहित अन्य मुद्दों पर विवि जरूर विचार करेगी। नॉन अटेंडिंग में किसी प्रकार की रियायत नहीं दी जाएगी।
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राजबीर मोर, रजिस्ट्रार, सीआरएसयू
 
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