उच्चतर शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास ज्वायफुल एक्टिविटी की जांच करने के लिए शनिवार को राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पहुंचे। इस दौरान उन्हें स्कूल में हो रही ज्वायफुल गतिविधियों को देखा और कहा कि यहां छात्राओं में काफी प्रतिभा है और इसको बाहर निकालना चाहिए। वहीं, शिक्षकों ने विभाग की इस योजना पर ही सवाल उठाए और कहा कि इससे पाठ्यक्रम पूरा नहीं हो पाएगा।
गतिविधियों की जांच के बाद स्कूल प्रभारियों की बैठक में एसीएस ने कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के मन में शिक्षकों का डर समाप्त करना है। उन्होंने कहा कि सिर्फ अच्छा विद्यार्थी नहीं बनाना है, अच्छा नागरिक बनाना है। पीके दास ने साफ किया कि सप्ताह के एक दिन शनिवार को अनुशासन पर अधिक जोर नहीं देना है। बच्चे अपने मन की बात और अपनी रुचि का काम करें। इसके पीछे उनका उद्देश्य विद्यार्थियों में सोचने की शक्ति विकसित करना, खुद को प्रस्तुत करने की क्षमता पैदा करना व सामाजिक विषय पर काम करने के लिए प्रेरित करना है।
शिक्षकों की शंका-एसीएस के जवाब
पिल्लूखेड़ा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल के प्राचार्य सत्यवान ने एसीएस से कहा कि चार रविवार तथा एक-दो राजपत्रित छुट्टी होती हैं। इसके साथ ही यदि शनिवार को भी पढ़ाई नहीं होगी तो सिलेबर कैसे पूरा होगा।
इस पर एसीएस पीके दास ने कहा कि पढ़ाई सिर्फ किताबों से ही नहीं होती। उन्होंने कहा,'मेरा मानना है किसी भी कक्षा में पूरे साल किताबों की जरूरत नहीं है। यदि कक्षा में प्रतिदिन पढ़ाई करवाई जाती है तो तीन महीने में पाठ्यक्रम पूरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के डर से बच्चे कुछ नहीं पूछते। इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें सब कुछ याद हो जाता है। शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच बनी दीवार को तोड़ना है।
शिक्षक: एक शिक्षक ने कहा,' मैं नेवी से सेवानिवृत्त हूं और मैने अपने स्तर पर बुडायन गांव में नर्सरी तैयार की है। उससे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकल रहे हैं, लेकिन उन्हें टीम के साथ जाने का मौका नहीं दिया जाता। शिक्षक टांग खिंचाई करते हैं और सोचते हैं यदि मैं गया तो उनसे ऊपर चला जाऊंगा। ऐसे में योग्य शिक्षकों को मौका दिया जाना चाहिए।
एएसीएस : योग्य शिक्षक को मौका दिया जाएगा। इसके लिए विभाग काम करेगा।
शिक्षक : हथो गांव के राजकीय उच्च विद्यालय के शिक्षक बलबीर सिंह ने कहा कि स्कूलों में जेनरेटर तो दिए हैं, लेकिन डीजल की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे ही कंप्यूटर हैं, लेकिन बिजली नहीं है। यदि इंटरनेट की व्यवस्था हो तो काम आसान हो सकता है।
एएसीएस : इसके लिए योजना बनाई जा रही है। कंप्यूटर के लिए एजेंसी हायर की जाएगी।
शिक्षक: सरकार ने मैनेजमेंट इंफोर्मेशन सिस्टम (एमआईएस) शुरू करते वक्त कहा था कि इससे काम आसान होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इससे काम बढ़ गया है। शिक्षक ने बताया कि हालात यह है कि नौंवीं कक्षा में भी 70 प्रतिशत विद्यार्थियों को हिंदी नहीं लिखनी आती। वहीं, मासिक परीक्षा के लिए पाठ्यक्रम निर्धारित किया जाता है और इसी से प्रश्नपत्र बनाए जाते हैं। ऐसे में ज्वायफुल गतिविधियों से काम मुश्किल हो जाएगा।
एएसीएस : नौंवी से 12वीं कक्षा तक पाठ्यक्रम अधिक है। इसे कम किया जा सकता है। एमआईएस के बोझ को भी वे महसूस कर रहे हैं। इसके लिए काम किया जा रहा है, ताकि अधिक परेशानी नहीं हो।
एसीएस बोले, चंडीगढ़ का गश्त बंद करें शिक्षक
शिक्षकों के तमाम सवालों पर एसीएस बोले, शिक्षक सबसे अधिक चंडीगढ़ गश्त करते हैं। इस पर रोक लगनी चाहिए। यह समय विद्यार्थियों को दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी शिक्षक की दिक्कत है तो वह सुगम पोर्टल पर या ईमेल से अपनी शिकायत भेज सकते हैं। इस पर जरूर गौर किया जाएगा।
दिसंबर में होगी पदोन्नति
अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास ने कहा कि पीजीटी से प्राचार्य की पदोन्नति दिसंबर माह में की जाएगी। पहले टीचर से पीजीटी पदोन्नति हुई थी। इसके बाद वे समय नहीं दे पाए हैं।
अच्छा प्रदर्शन नहीं करने वालों पर गिरेगी गाज
पीके दास ने शिक्षकों को साफ शब्दों में कहा कि वर्ष 2017-18 में जो भी शिक्षक और स्कूल मुखिया अच्छा प्रदर्शन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। उन शिक्षकों को ही सबसे पहले दूर का स्टेशन दिया जाएगा। इसके लिए टेस्ट लिया जाएगा।