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Jind News: गांवों में आज भी मिट्टी के दीयों से जगमगाती है परंपरा की लौ

Fri, 17 Oct 2025 11:51 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
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17जेएनडी24 : घर पर मिट्टी के दिये तैयार कर रहे कारीगर। संवाद।
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नरवाना। त्योहारी सीजन शुरू होते ही लोग अपने घरों को सजाने में जुट जाते हैं। बाजारों में इलेक्ट्रिक और धातु के रंग-बिरंगे दिए अपनी चमक बिखेर रहे हैं लेकिन गांवों में आज भी परंपरा की लौ मिट्टी के दीयों से ही जगमगाती है।
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नरवाना क्षेत्र के कई गांवों में महिलाएं आज भी घर-घर जाकर पूजा के लिए मिट्टी से बने दिए बांटती हैं। यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी है बल्कि हस्तशिल्प की उस विरासत को भी जीवित रखे हुए है जो पीढ़ियों से गांवों की पहचान रही है। दीपावली की पूजा में मिट्टी के दीयों का विशेष स्थान माना गया है।
मान्यता है कि मिट्टी के दिए पवित्रता और सादगी का प्रतीक होते हैं। भगवान लक्ष्मी-गणेश की आराधना में इन्हीं दीयों से आरती की जाती है। हालांकि अब बाजार में इलेक्ट्रिक और धातु के दिए इन पारंपरिक दीयों की जगह ले रहे हैं।
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आधुनिकता की चकाचौंध में जहां परंपराएं धीरे-धीरे फीकी पड़ रही हैं वहीं गांवों की ये महिलाएं और कारीगर आज भी अपने परिश्रम और संस्कृति के प्रति समर्पण से उस परंपरा की लौ को जलाए हुए हैं जो दीपावली की असली रोशनी है।

घर-घर जाकर बेचते हैं दिये

नरवाना के शास्त्री नगर क्षेत्र में रहने वाले मिट्टी के हस्तशिल्पकार दयाराम प्रजापत, गजराज प्रजापत और कन्हैया प्रजापत ने ने बताया कि मार्च से ही दीये बनाने की प्रक्रिया में शुरू हो जाती है और दीपावली तक लाखों दिये बनाकर तैयार कर लेते हैं जो दीपावली के से दो-तीन दिन पहले ही गांव में घर-घर जाकर दिये बेचते हैं। वहीं शहरों में भी दिये बेचते हैं।
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