क्षेत्र में नागरिक अस्पताल के अलावा उझाना में पीएचसी और चार पीएचसी है, लेकिन नरवाना को छोड़कर कहीं भी कोई एम्बुलेंस नहीं है जबकि नरवाना क्षेत्र की आबादी साठ हजार से ऊपर है। कांग्रेस सरकार ने वर्ष दो 2007 में यहां चार एम्बुलेंस भेजी थी, लेकिन अब घटकर दो रह गई हैं। आबादी के साथ सरकार के दावे भी बढ़े, लेकिन गरीबों के काम आने वाली एंबुलेंस आधी रह गई। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पहले एंबुलेंस बड़ी थी, जिसमें एक साथ दो या तीन मरीज आ जाते थे। लेकिन अब एम्बुलेंस छोटे साइज की हो गई है। सीएचसी उझाना के अलावा पीएचसी दनौदा, धमतान और धनौरी में डिलीवरी हट भी बनाए गए हैं जहां हर रोज किसी न किसी महिला की डिलीवरी होती है। कांग्रेस सरकार ने शुरू में दो एम्बुलेंस नरवाना और एक एक धमतान तथा उझाना में छोड़ी थी। उझाना की एंबुलेंस धनौरी तक और धमतान की एम्बुलेंस दनौदा तक के मरीजों को सुविधा दे देती थी, लेकिन अब कहीं भी जरूरत हो एम्बुलेंस नरवाना से बुलानी पड़ती है।
नरवाना से बुलाते हैं एम्बुलेंस
सीएचसी उझाना की प्रवर चिकित्सक अधिकारी डॉ. शशि सिंगला ने बताया कि पहले उनके पास एम्बुलेंस थी अब जरूरत पड़ने पर नरवाना से बुलाते हैं। कई बार आने में देर भी लग जाती है जिससे मरीजों को परेशानी होती है। उन्होंने विभाग को कभी एम्बुलेंस की जरूरत का पत्र नहीं लिखा है।
नरवाना के अस्पताल में दो एम्बुलेंस हैं। ऐसा कम ही मौका आया है कि एम्बुलेंस के लिए ज्यादा समय इंतजार करना पड़ा हो। लोगों ने कभी एम्बुलेंस की कमी की शिकायत भी नहीं की। एम्बुलेंस की संख्या बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
- डॉ. राजेश भोला, एम्बुलेंस इंचार्ज, नागरिक अस्पताल जींद।