04जेएनडी03: घर में सजाई गई बगिया की देखभाल करते हुए डॉ. पूनम अहलावत। संवाद
जींद। प्रकृति से प्रेम और हरियाली के प्रति समर्पण अगर सच्चा हो तो सीमित जगह में भी सपनों की सुंदर बगिया को संजोया जा सकता है। एसे ही सपने को सफल करने में कामयाब रही हैं अध्यापिका डॉ. पूनम अहलावत। इन्होंने अपने घर को ही हरियाली से भरपूर एक लोन में तब्दील कर दिया है।
डॉ. पूनम के घर में 60 से अधिक किस्मों के फूल, औषधीय और मौसमी पौधे गमलों में लहलहा रहे हैं। ये न केवल घर की सुंदरता बढ़ा रहे हैं बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी लाभकारी साबित हो रहे हैं। डॉ. पूनम अहलावत बताती हैं कि इन्हें बचपन से ही पेड़-पौधों से विशेष लगाव रहा है। सास-ससुर को भी बागवानी का शौक था।
बड़ों से प्रेरणा लेकर उन्होंने इस बगिया को संवारना शुरू किया। समय के साथ जिम्मेदारियां बढ़ीं लेकिन प्रकृति प्रेम कम नहीं हुआ। अब ससुर के न रहने के बाद भी पूनम इस बगिया की देखभाल कर रही हैं और इसे परिवार की धरोहर मानती हैं।
रंग-बिरंगे फूलों से महक रही बगिया
डॉ. पूनम के घर में गुलाब, गेंदा, चमेली, पेटूनिया, एंथूरियम जैसे रंग-बिरंगे फूलों के साथ-साथ तुलसी, एलोवेरा, गिलोय, पुदीना, करी पत्ता, अश्वगंधा जैसे औषधीय पौधे भी मौजूद हैं। इन पौधों से घर में ही प्राकृतिक चिकित्सा का लाभ मिल जाता है। बदलते मौसम में तुलसी और गिलोय काढ़ा बनाकर परिवार की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जाती है। वहीं एलोवेरा त्वचा और स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है। अध्यापिका होने के बावजूद डॉ. पूनम अहलावत रोजाना ड्यूटी से लौटने के बाद बगिया की संभाल करती हैं। पौधों को पानी देना, सूखी पत्तियां हटाना और नए पौधों को तैयार करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। वह मानती हैं कि बागवानी न केवल शारीरिक श्रम है बल्कि मानसिक सुकून का भी बड़ा साधन है। दिनभर की थकान हरियाली के बीच कुछ समय बिताने से अपने आप दूर हो जाती है। उनकी इस पहल से कई महिलाएं भी प्रेरित हुई हैं। उनकी महिला मित्रों ने भी उनसे मार्गदर्शन लेकर अपने-अपने घरों में बगिया सजानी शुरू कर दी है। पूनम महिलाओं को संदेश देती हैं कि सीमित जगह और व्यस्त दिनचर्या के बावजूद पौधों के लिए थोड़ा समय निकाला जा सकता है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ परिवार का स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है।