यहां के स्वास्थ्य विभाग की टीम और पुलिस ने उत्तर प्रदेश के मेरठ में प्रसव पूर्व भ्रूण परीक्षण करने वाली एक महिला डॉक्टर सविता गर्ग को गिरफ्तार कर लिया।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मेरठ के बच्चा पार्क क्षेत्र में चल रहे गर्ग अल्ट्रासाउंड सेंटर की अल्ट्रासाउंड मशीन को सील कर दिया। स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने लिंग परीक्षण के लिए छह हजार रुपये भी आरोपी चिकित्सक से बरामद कर लिया। हालांकि डॉक्टर को बचाने उतरी वहां की आईएमए इकाई और राजनेताओं ने डॉक्टर को छुड़वा लिया। देर रात तक वहां थाने में हंगामा चलता रहा।
जींद की एक गर्भवती महिला स्वास्थ्य विभाग की एक एएनएम के संपर्क में थी। इससे एएनएम को पता चला कि मेरठ के बच्चा पार्क क्षेत्र में गर्ग अल्ट्रासाउंड सेंटर पर लिंग परीक्षण किया जाता है।
इस पर करीब तीन महीने की गर्भवती महिला को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने डमी ग्राहक बनाया और बुधवार दोपहर वहां भेजा। महिला ने गर्ग अल्ट्रासाउंड केंद्र के कर्मचारियों से बात कर छह हजार रुपये में सौदा तय कर लिया। महिला का इशारा मिलते ही, टीम ने महिला चिकित्सक डॉ. सविता गर्ग को पैसों के साथ दबोच लिया।
जींद में हुई है एफआईआर
डीसी विनय सिंह के अनुसार प्रशासन इस मामले पर पहले से तैयारी चल रही थी। इसके चलते पहले ही जींद में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर की गई और इसके बाद इस ऑपरेशन के लिए गठित टीम को मेरठ रवाना किया गया। स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. सतीश सुलेख के नेतृत्व में टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
जुलाना की कार्रवाई से खुला राज
स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष सूत्रों के अनुसार दो दिन पहले ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जुलाना में लड़का होने की दवा देने वाले एक वैद्य को काबू किया था। वहीं से प्रशासन को मेरठ में चल रहे इस गोरखधंधे की जानकारी मिली है।
अब जींद में नहीं होता लिंग परीक्षण
इससे यह साफ हो रहा है कि अब जींद में लिंग परीक्षण का काम नहीं होता। यही कारण है कि लोग बाहर जा रहे हैं। प्रशासन ने पूरी सख्ती की है और इसका परिणाम है।
विनय सिंह, डीसी जींद।
डॉक्टर को बचाने उतरी फौज, कब्जे से छुड़ाया
मेरठ। रंगे हाथों लिंग की जांच करते पकड़ी गई डॉ. सविता गर्ग को बचाने के लिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से लेकर सत्ताधारी पार्टी के कई बड़े नेता उतर आये। थाना सिविल लाइन में बुधवार देर रात हरियाणा टीम के साथ घंटों तक चली गहमागहमी के बाद डॉ. सविता और उसके पति डॉ. विनोद गर्ग को नोटिस देकर हरियाणा टीम से छुड़ा लिया गया। आईआईएम के साथ कई अधिवक्ता भी थाने में पैरवी करते नजर आये।
नतीजा यह हुआ कि पूरा पुलिस अमला भी भ्रूण हत्या में लिप्त डॉक्टर दंपति की पैरवी करता नजर आया।
उधर, हंगामे के बाद डॉक्टर दंपती को 41 ए का नोटिस देकर छोड़ दिया गया, लेकिन हरियाणा टीम सील की गई मशीन और तमाम अहम कागजात अपने साथ ले गई।
नोटिस के तहत डॉक्टर दंपति को को 30 दिंसबर को जींद कोर्ट में पेश होना होगा। छापा मारने आये टीम के इंचार्ज डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. सतीश सुलेख ने सारे मामले को हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री से लेकर सीएम तक रखने की बात कही है।
उन्होंने साफ किया है कि यूपी की पुलिस और आईएमए ऐसे डॉक्टर को बचाने में उतरे हैं जिसने सैकड़ों बेटियों की जान ली हैं और अहम सबूत होते हुए भी उसे नोटिस दिलवाकर छुड़वाया गया है।
इस्तीफा दे दूंगा लेकिन लेकर जाऊंगा
मेरठ में हरियाणा टीम के साथ जो भी कुछ घटित हो रहा था उसकी जानकारी पंचकुला में बैठे पीसीपीएनडीटी के डिप्टी डायरेक्टर को दी गई तो उन्होंने डॉ. सतीश सुलेख को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आप लोगों को स्थानीय प्रशासन और पीसीपीएनडीटी टीम को साथ लेकर कार्रवाई करनी चाहिये थी जिस पर डॉ. सुलेख बिगड़ गए और उन्होंने फोन पर ही कहा साहब मैं कोई भ्रष्ट अधिकारी नहीं हूं और मैंने रंगे हाथों सारा मामला पकड़ा है, आज अगर पुलिस इसे नहीं ले जाने देती है तो इस्तीफा दे दूंगा।