जिला परिषद चेयरपर्सन पदमा सिंगला के खिलाफ 26 में से 20 जिला पार्षदों द्वारा अविश्वास के शपथपत्र देने के बाद कुर्सी की जंग तेज हो गई है। वीरवार को 19 पार्षद परिवार सहित आउट ऑफ स्टेट चले गए। इससे मौजूदा चेयरपर्सन पदमा सिंगला की कुर्सी पर खतरा बढ़ गया है। पार्षदों का कहना है कि वे किसी एक उम्मीदवार के लिए, बल्कि चेयरपर्सन पदमा सिंगला के खिलाफ एकजुट हैं।
जिला परिषद चेयरपर्सन की कुर्सी महिला के लिए आरक्षित होने के कारण हालांकि मुकाबला कुछ ढीला है। फिलहाल 11 महिलाएं जिला परिषद की सदस्य हैं, जिनमें से दो-तीन के नाम चेयरपर्सन के लिए आगे आ रहे हैं। इस बार गणित त्रिकोणीय हो सकता है। ऐसे में पार्षदों की लोबिंग तेज हो गई है। अब इन दोनों उम्मीदवारों के साथ वार्ड-12 से गुंजन दलाल का नाम भी आगे चल रहा है। इसके अलावा, वार्ड-19 की पार्षद गीता ने भी अपना दावा मजबूत किया है। अब इसका फैसला प्रशासन द्वारा चुनाव की तारीख तय होने के बाद ही होगा। गौरतलब है कि पदमा सिंगला मात्र एक मत से जीतकर 15 मार्च 2016 को चेयरपर्सन बनी थीं। उनका सीधा मुकाबला वार्ड-25 से प्रवीण देवी से था।
केंद्रीय मंत्री की भूमिका फिर होगी अहम
केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह की भूमिका इस बार होने वाले चुनाव में भी महत्वपूर्ण होगी। पिछले चुनाव में चौधरी बीरेंद्र सिंह के प्रयासों से ही उनके खासमखास विनोद सिंगला की पत्नी को चेयरपर्सन का पद मिला था। वहीं, उप प्रधान के पद पर काबिज हुए उम्मेद सिंह रेढू इनेलो समर्थक माने जाते हैं। उम्मेद सिंह रेढू ने स्वयं कहा है कि केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह और सांसद रमेश कौशिक ही प्रधान का फैसला करेंगे।
डीसी विनय सिंह ने बताया कि पार्षदों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव सौंपे जाने के बाद आवश्यक कार्यवाही की जा रही है। अभी तारीख तय नहीं की गई है। जल्द ही इसकी घोषणा की जाएगी।