हवा में बढ़ रहे प्रदूषण का असर अब अस्पतालों में भी साफ दिखाई देने लगा है। इस समय जींद जिले की हवा में प्रदूषण का स्तर 456 पर पहुंच गया है जोकि मानव स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है। यह स्तर रेड जोन में आता जाता है। इसके चलते नागरिक अस्पताल में शुक्रवार को मरीजों की भारी भीड़ रही। इनमें अधिकतर मरीज एलर्जी, आंखों में पानी आने व सांस के रहे। आमतौर पर नागरिक अस्पताल की ओपीडी 1400 के आसपास रहती है लेकिन पिछले दो दिनों से ओपीडी 1700 तक पहुंच गई। अकेले 17 प्रतिशत ओपीडी केवल आंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी वाले मरीजों की है।
हवा में प्रदूषण इस कदर बढ़ गया है कि शुक्रवार को जींद स्मॉग की चादर से ढका रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में तो सुबह के समय सड़क पर दृश्यता बेहद कम रही। वाहन चालकों को पास का भी कुछ नहीं दिखाई दे रहा था। ऐसे में वाहन चालक सुबह के समय लाइटें जलाकर वाहन चलाते हुए दिख रहे थे। हालांकि सूर्य देवता बादलों की ओट से बीच-बीच में झांक भी रहे थे लेकिन स्मॉग इतना गहरा था कि सूर्य की तपिश बेअसर थी। शहर में हर तरफ लोग को मुंह को ढके रहे।
आंखों में जलन व सांस के रोगियों की बढ़ने लगी है परेशानी
जिले की हवा में प्रदूषण का स्तर 456 पर पहुंच गया है जोकि मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद ही हानिकारक है। ऐसे में आंखों में जलन और सांस रोगियों को भी परेशानी होने लगी है। नागरिक अस्पताल के साथ-साथ निजी अस्पतालों में भी मरीज पहुंचने शुरू हो गए हैं। नागरिक अस्पताल की बात की जाए तो यहां पिछले दो दिन से आंखों में जलन के डेढ़ गुणा मरीज सामने आए हैं। अस्पताल की नेत्र रोग विशेषज्ञ डाॅ. गीतांशु ने बताया कि आंखों में पानी आने व जलन की शिकायत लेकर मरीज आ रहे हैं। इसलिए सभी को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। इसके अलावा सांस के रोगी भी अस्पताल में उपचार के लिए आ रहे हैं।
स्मॉग से हो सकती है यह समस्याएं
डिप्टी एमएस डाॅ. राजेश भोला ने बताया कि स्मॉग से आंखों में जलन, श्वास संबंधी परेशानियां, फेफड़ों में संक्रमण, घबराहट, सिरदर्द, तनाव, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन और त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। सबसे ज्यादा परेशानी अस्थमा मरीजों को होती है। ऐसे में अस्थमा के मरीजों को तो इस मौसम में विशेष सावधानी रखने की जरूरत होती है।
यह रखें सावधानियां
डाॅ. राजेश भोला ने बताया कि सुबह-शाम टहलने से बचें। कमरे में एग्जॉस्ट चलाएं। घर से बाहर निकले तो मुंह पर रुमाल या मास्क लगा लें। पेय पदार्थ ज्यादा लें। गरम पानी का प्रयोग करें। खांसी, गले और छाती में संक्रमण आदि बीमारियां हो से संपर्क करें। जिन लोगों को अस्थमा है उनके लिए यह काफी खतरनाक है। ऐसे में खिड़कियां या दरवाजे बंद रखें। कोई परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सक से सलाह लें। हरी सब्जियों व पौष्टिक आहार का सेवन करें, धूम्रपान को ना कहें। बाहर से आने के बाद गुनगुने पानी से मुंह, आंखें और नाक साफ करें।