जींद। नवरात्र के पांचवें दिन शनिवार को श्रद्धालुओं ने मां स्कंदमाता की पूजा अर्चना की। शहर के प्रसिद्ध मंदिर जयंती देवी मंदिर, भूतेश्वर मंदिर, सोमनाथ मंदिर, राधा कृष्ण मंदिर, रघुनाथ मंदिर में सुबह से ही भक्त माथा टेकने के लिए पहुंचना शुरू हो गए।
जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि देवी मां का पांचवां स्वरूप स्कंदमाता का है। स्कंदमाता को ही महेश्वरी, गौरी और पार्वती भी कह कर पुकारा जाता है।
उन्होंने कहा कि सौभाग्य की देवी स्कंदमाता असुरों का दमन करने वाली और परम वैभवशाली हैं। सूर्य मंडी की अधिष्ठात्री देवी होने के कारण इनका उपासक अलौकिक तेज और कांति से संपन्न हो जाता है। नवरात्र में मां भगवती अपने भक्तों मनोकामना अवश्य पूरी करती हैं। मंदिर प्रांगण में हर दिन जागरण का आयोजन किया जा रहा है।
मन मां के चरणों में पिरोकर रखो : पवन
आचार्य पवन शर्मा ने माता वैष्णवी धाम में आयोजित नवार्ण महायज्ञ के दौरान कहा कि कछुआ रहता तो पानी में है, उसका मन रहता है किनारे पर जहां उसके अंडे रखे रहते हैं। इसी प्रकार संसार में रहकर संसार का कार्य तो करो किंतु मन मां के चरणों में पिरोकर रखो। मां से विमुख होकर यदि संसार में रहोगे तो दिनों दिन उलझनों में फंसते चले जाओगे और यहां तक फंस जाओगे कि फिर उनसे बचना मुश्किल हो जाएगा। इस दौरान डाॅ. अनुपम भाटिया, डाॅ. विवेक सिंगला, संदीप डोडा, राजबीर तंवर, गौरव गुम्बर, बीरबल परूथी, कपिल तंवर ने सपरिवार मां भगवती की पूजा अर्चना कर महायज्ञ में आहुति दी। इस मौके पर अनिल मंगला, विकास ग्रोवर, कर्ण सैनी, जगदीश अरोड़ा, हरीश एलाहबादी, रविंद्र शर्मा, तिलक भोला, दिनेश शर्मा और कार्तिकेय शर्मा मौजूद रहे।
27जेएनडी13: जयंती देवी मंदिर में मां भवगती की आरती करते हुए श्रद्धालु। पुजारी