संवाद न्यूज एजेंसी।
नरवाना। सोमवार को लघु सचिवालय परिसर में हुई नगर परिषद की बैठक हंगामे की भेंट चढ़ी गई। विकास कार्यों पर ठोस चर्चा की उम्मीद लेकर बैठक में पहुंचे पार्षदों को हंगामे, आरोप-प्रत्यारोप और लंबी बहस के सिवाय कुछ खास हासिल नहीं हुआ।
बैठक करीब एक घंटे की देरी से शुरू हुई और इसकी अध्यक्षता चेयरपर्सन मुकेश रानी मिर्धा ने की। कार्यकारी अधिकारी रविंद्र कोहाड़ ने जैसे ही एजेंडों पर कार्रवाई शुरू करने की कोशिश तो सदन में शोर-शराबा तेज हो गया। वार्ड नंबर पांच के पार्षद विपुल नैन ने फाइनेंस कमेटी को कठघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया कि बिना बैठक किए ही बजट पास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कमेटी के कुछ सदस्य अपने हितों के अनुसार टेंडर मंजूर करवा लेते हैं जबकि अन्य पार्षदों की कोई सुनवाई नहीं होती। इस पर ईओ ने स्पष्ट किया कि फाइनेंस कमेटी का गठन सदन की मंजूरी से हुआ है और इससे जुड़ा मामला अदालत में विचाराधीन है। उन्होंने पार्षदों से सवाल कमेटी के समक्ष रखने की बात कही।
इसी मुद्दे पर सदन में करीब 15 मिनट तक तीखी बहस होती रही, जिससे कार्यवाही ठप रही। बहस के दौरान कई पार्षदों ने शहर में विकास कार्य ठप होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि काम न होने की नाराजगी जनता सीधे उनके घरों पर उतार रही है। कुछ पार्षदों ने हालात इतने बिगड़ने की बात कही कि कपड़े फाड़ने जैसी स्थिति बन जाती है।
मीटिंग केवल चाय पकौड़े के लिए होती है -पार्षद
पार्षद आशुतोष शर्मा ने नाराजगी जताते हुए कहा कि मीटिंग केवल चाय पकौड़े के लिए होती है। खाते पीते हैं, बहस करते हैं और निकल जाते हैं। उन्होंने कहा कि हम सिर्फ औपचारिकता निभाने नहीं आए हैं बल्कि जनता की समस्याओं का समाधान चाहते हैं। उन्होंने कहा कि परिषद में न पहले कोई ठोस काम हुआ और न ही अब हालात बेहतर हो रहे हैं। काफी देर बाद माहौल शांत होने पर एजेंडों पर चर्चा शुरू हो सकी। इस मीटिंग में कैलाश सिंगला, सोनू, सत्यवान बेदी, गौरव सेतिया, बलजीत चोपड़ा आदि पार्षद मौजूद रहे।
इन एजेंडों पर बनी सहमति
बैठक में कुल 10 एजेंडों को रखा गया जिनमें से 9 पर सहमति बनी। जैव विविधता कमेटी के गठन, एमआरएफ सेंटर की चहारदीवारी, 14 लेफ्ट आउट पैच, लाल डोरा प्रमाण पत्र सूची, सभी वार्डों में आरसीसी बेंच लगाने, बंदरों को पकड़ने के टेंडर, अदालतों में लंबित मामलों की पैरवी, बैलेंस शीट तथा कर्मचारियों के ईपीएफ-ईएसआई भुगतान जैसे प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। हालांकि, कूड़ा निपटान से जुड़ा एजेंडा पार्षदों ने सिरे से खारिज कर दिया।