पांच दिन पहले हुई बारिश से लोगों को गर्मी से तो राहत मिल गई लेकिन बाहरी कॉलोनियों में पड़े खाली प्लाटों में पानी ठहरने से परेशानी भी बढ़ गई है। खाली प्लाटों में ठहरे पानी में अब मच्छर पनपने लगे हैं और इससे आने वाले दिनों में डेंगू व मलेरिया बढ़ सकता है। हालांकि अभी तक डेंगू का एक ही केस सामने आया है जबकि पिछले साल डेंगू के 98 और मलेरिया के 17 केस आए थे। बेशक मच्छर पनपने लगे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की तैयारी अभी तक नहीं है।
अभी तक चले स्वास्थ्य विभाग के अभियान में बेशक डेंगू का एक केस आया है, लेकिन कई जगह डेंगू का लार्वा मिल चुका है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग गंभीर नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार डेंगू या मलेरिया का केस आने के बाद उस क्षेत्र में अभियान चलाया जाएगा, लेकिन डेंगू या मलेरिया नहीं हो, इसके लिए कोई योजना फिलहाल नहीं है। दरअसल यह मौसम डेंगू व मलेरिया के मच्छरों के लिए काफी उपयुक्त माना जाता है। ऐसे में खतरा काफी बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार मच्छर ठहरे हुए पानी में अधिक पनपता है। मच्छर को पनपने से रोकने के लिए पानी की निकासी होना अनिवार्य है।
काला तेल खरीदने पर भी तकरार
मानसून के मौसम से पहले ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा खाली प्लाटों या अन्य स्थानों पर ठहरे हुए पानी में डालने के लिए काला तेल खरीदने की प्रक्रिया चली थी लेकिन अभी तक यह आगे नहीं बढ़ी है। दरअसल स्वास्थ्य विभाग रोडवेज से मुफ्त में काला तेल मांग रहा था लेकिन रोडवेज मुफ्त में काला तेल देने से मना कर दिया। हालांकि इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के पास बजट भी आया हुआ है। इसके बाद इस मामले में लापरवाही बरती जा रही है।
सिर्फ जागरूकता में जुटा है स्वास्थ्य विभाग
हालांकि मलेरिया व डेंगू को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा फीवर मास सर्वे चलाया जा रहा है और इस दौरान लोगों को मच्छर नहीं पनपने देने के लिए जागरूक किया जा रहा है लेकिन बड़े स्तर पर खाली प्लाटों व गलियों में भरे पानी पर अभी तक प्रशासन ने कुछ नहीं किया है।
नहीं दिया है नोटिस
स्वास्थ्य विभाग द्वारा भले ही जांच की जा रही है, पानी ठहरने के कारण मच्छर पनपने की संभावना पर किसी को भी नोटिस नहीं दिया है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग खाली प्लाट में पानी ठहरने पर 100 रुपये जुर्माना भी कर सकता है लेकिन इसकी जहमत नहीं उठाई जा रही है।
दूसरों को नसीहत, खुद मियां फजीहत
भले ही स्वास्थ्य विभाग डेंगू व मलेरिया से बचने के लिए दूसरों को नसीहत देते घूम रहा है, लेकिन खुद नागरिक अस्पताल में ही जलभराव की समस्या है। इसको लेकर भी स्वास्थ्य विभाग कुछ नहीं कर पा रहा है।
हो सकती हैं बीमारियां
बारिश के मौसम में आमतौर पर जलभराव की स्थिति रहती है। इससे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियां हो सकती हैं। वहीं यदि यह पानी पेयजल की लीकेज पाइप लाइन के संपर्क में जाता है तो पीलिया और हैजा गंभीर बीमारी का भी कारण बन सकता है।
अपने आसपास नहीं रुकने दें पानी
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मलेरिया व डेंगू के मच्छर रुके हुए पानी में ही होते हैं, ऐसे में अपने आसपास पानी नहीं ठहरने दें। यदि पानी की निकासी नहीं है तो इसमें मिट्टी का तेल या काला तेल डाला जा सकता है। इससे पानी के ऊपर एक परत बन जाएगी और इस पर मच्छर नहीं पनपेंगे। बुखार होने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाएं।
पिछले पांच साल में आए डेंगू व मलेरिया के केस
साल मलेरिया डेंगू
2014 51 01
2015 45 668
2016 17 156
2017 27 135
2018 17 98
मलेरिया और डेंगू के मौसम को देखते हुए नगर परिषद तैयार है, शहर में फोगिंग का शेड्यूल बनाया जा रहा है। जल्द ही फोगिंग शुरू करवाई जाएगी ताकि मच्छर नहीं पनपे।
पूनम सैनी, चेयरपर्सन, नगर परिषद, जींद।
सीधी बात, सिविल सर्जन डॉ. शशि प्रभा अग्रवाल के साथ
सवाल: बारिश के बाद खाली प्लाटों में पानी ठहरा हुआ है इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग की क्या योजना है।
जवाब: पानी स्वास्थ्य विभाग नहीं निकालेगा, यह काम जनस्वास्थ्य विभाग का है।
सवाल: पानी भरने वाले प्लाट मालिकों को स्वास्थ्य विभाग नोटिस देकर जुर्माना कर सकता है। क्या ऐसा किया है।
जवाब: नहीं अभी तक ऐसा अभियान नहीं चलाया है। यह अभियान शुरू किया जाएगा।
सवाल: ठहरे हुए पानी में तेल डालने की क्या स्थिति है।
जवाब: इस पर भी टीम बनाकर काम शुरू किया जाएगा।