हेल्थ पॉलिसी लेने के बावजूद भी पॉलिसी धारक को इलाज का खर्च नहीं देने पर जिला उपभोक्ता शिकायत निवारण आयोग ने बीमा कंपनी को पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह राशि जिला स्तर पर स्वास्थ्य विभाग को दी जाएगी। इसे जरूरतमंद लोगों के इलाज पर खर्च करने के आदेश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त आयोग ने कंपनी को इलाज पर खर्च 135876 रुपये नौ प्रतिशत ब्याज सहित चुकाने, मानसिक परेशानी की एवज में दस हजार रुपये व कानूनी खर्च के तौर पर पांच हजार रुपये का भी जुर्माना लगाया है।
नरवाना के मॉडल टाउन निवासी घनश्याम दास ने आठ जून 2019 को स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से दस लाख रुपये का मेडिक्लेम बीमा करवाया था। इसके बाद 30 जुलाई को घनश्याम दास को सीने में तकलीफ हुई तो उन्होंने हिसार स्थित जिंदल अस्पताल में इलाज करवाया। दो अगस्त को घनश्याम को यहां से छुट्टी मिल गई। उन्होंने इलाज पर खर्च हुई राशि का क्लेम लेने के लिए आवेदन किया। इस पर कंपनी ने यह कहते हुए राशि देने से मना कर दिया कि उन्हें पहले से ही यह बीमारी थी। इसके बाद 17 मार्च 2020 को घनश्याम दास ने जिला उपभोक्ता शिकायत निवारण आयोग की शरण ली। मामले को लेकर आयोग ने 12 बार सुनवाई के लिए तारीख तय की, लेकिन एक बार भी कंपनी की तरफ से कोई प्रतिनिधि या जवाब नहीं आया। ऐसे में आयोग के चेयरमैन मनजीत सिंह नरयाल, सदस्य जसविंद्र सिंह व सदस्य नीरू अग्रवाल की खंडपीठ ने इस पर फैसला सुनाई करते हुए फैसला सुनाया है।
दान नहीं, उपकरण ले सकते हैं
हालांकि अभी तक फैसले की प्रति नहीं मिली है, लेकिन ऐसा फैसला जानकारी में आया है। सरकारी अस्पताल में नकदी के रूप में दान नहीं लिया जा सकता। यहां सारा खर्च जरूरतमंद लोगों पर ही होता है। ऐसे में उपकरण या अन्य जरूरत का सामान लिया जाता है। -डॉ. मनजीत सिंह, सिविल सर्जन, जींद।
अधिकारों के प्रति जागरूक रहें उपभोक्ता
उपभोक्ता के काफी अधिकार हैं। इनके प्रति जागरूकता की जरूरत है। कोई भी सामान खरीदते समय पक्का बिल जरूर लें। यही वह प्रमाण है जो हमें उपभोक्ता बनाता है। कोई भी पॉलिसी या सेवा के दौरान नियमों को सही प्रकार से पढ़ें व समझें। इससे काफी मदद मिलती है।
विनोद बंसल, एडवोकेट।