जींद। भवन निर्माण कामगार यूनियन के आह्वान पर जिलेभर के निर्माण व मनरेगा मजदूरों ने वीरवार को डीआरडीए में रोष सभा की। इसके बाद में मजदूरों ने लघु सचिवालय में प्रदर्शन किया व सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बाद में प्रदर्शनकारी मजदूरों ने मांगों को लेकर ज्ञापन डीसी मोहम्मद इमरान रजा को सौंपा। डीसी ने आश्वासन दिया कि एक सप्ताह के अंदर संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक करवा कर मजदूरों कि समस्याओं को हल करवाने की पूरी कोशिश की जाएगी।
यूनियन जिला प्रधान कश्मीर सेलवाल ने कहा कि जिलाभर के निर्माण व मनरेगा मजदूरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। श्रम कल्याण बोर्ड पूरी तरह से भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है। पिछले चार-पांच सालों से सैंकड़ों निर्माण मजदूरों का कन्यादान, मृत्यु सहायता, मातृत्व, पितृत्व इत्यादि कि सुविधाएं अटकी हुई हैं। इन मजदूरों के पास दलालों के फोन आते हैं और 30 से 40 प्रतिशत कमीशन की मांग करते हुए कहते हैं कि एक सप्ताह के अंदर आपके पैसे आ जाएंगे, लेकिन जब मजदूर मना कर देते हैं तो उनके आवेदनों पर अनाप-शनाप आपत्तियां लगाकर आवेदनों को रद्द कर दिया जाता है। बिना दलालों के श्रम कल्याण बोर्ड से सुविधा प्राप्त करना लगभग नामुमकिन हो गया है। जिला सचिव कपूर सिंह ने बताया कि निर्माण मजदूरों की भांति मनरेगा के मजदूरों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पिछले तीन-चार साल से पांच किलोमीटर दूर काम पर जाने पर भी किराया नहीं दिया जा रहा है, जबकि कानून के तहत किराया देने का प्रावधान है। दुर्घटना में चोट लगने पर किसी प्रकार के इलाज का प्रबंध नहीं किया जा रहा है। रमेश चंद्र व कपूर सिंह ने मांग की है कि जींद के श्रम कल्याण बोर्ड कार्यालय में सहायक निदेशक, सहायक कल्याण अधिकारी और अन्य सहायक स्टाफ की स्थाई नियुक्ति की जाए। निर्माण मजदूरों के 90 दिन के काम की तसदीक का अधिकार यूनियनों को भी दिया जाए। नए पंजीकरण को अप्रवूल करवाया जाए व पंजीकरण करने वाले कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जाए। मजदूरों की वर्षों से लंबित पड़ी विभिन्न तरह की कल्याणकारी सुविधाओं की राशि जारी करवाई जाए। परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) की वजह से श्रमिकों के पंजीकरण व सुविधाओं के आवेदनों में बड़ी समस्या आ रही है। इसलिए पीपीपी की शर्त खत्म की जाए। एनसीआर क्षेत्र के अंतर्गत ग्रैप निर्वाह भत्ता योजना की तिथि बढ़ाई जाए। जींद शहर सहित सभी शहरों में लेबर शेड बनवाया जाए। निर्माण मजदूरों के लिए बनाई गई कैंटीन की जगह लघु सचिवालय से बदलकर जहां मजदूर खड़े होते हैं, वहां पर बनाई जाए। मनरेगा मजदूरों की जिओ टैग व ऑनलाइन हाजिरी पर रोक लगवाई जाए। मनरेगा मजदूरों को दुर्घटना होने पर फ्री इलाज का प्रबंध किया जाए और मृत्यु उपरांत परिवार को 10 लाख मुआवजा दिया जाए।