फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jind News: वीसी से सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही में जुड़े डल्लेवाल को बात रखने का नहीं मिला समय

Thu, 19 Dec 2024 11:53 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
विज्ञापन
19जेएनडी01: किसान नेता जगजीत डल्लेवाल की खराब हुई तबीयत के दौरान संभाल करते किसान। स्रोत किसान
विज्ञापन
नरवाना। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का स्वास्थ्य वीरवार को बाथरूम से नहाकर निकलते समय बिगड़ा गया। होश में आने के बाद वह सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई को लेकर चिंता जाहिर की और कहा कि वीसी की क्या तैयारियां हैं।
विज्ञापन

किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने बताया कि दोनों मोर्चों ने बातचीत करके फैसला लिया था कि जगजीत सिंह डल्लेवाल वीसी के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई से जुड़कर किसानों का पक्ष रखेंगे, लेकिन अचानक से उनकी तबीयत बिगड़ गई। उसके बावजूद जब जगजीत सिंह डल्लेवाल लगभग पौने दो बजे होश में आए तो, उन्होंने सभी साथियों से पूछा कि वीसी की क्या तैयारी चल रही है। मोर्चा पर मौजूद चिकित्सकों व अन्य साथियों के मना करने के बावजूद वह वीसी के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई में जुड़े, लेकिन उनको अपनी बात रखने का समय नहीं दिया गया। वह 12 से 15 मिनट तक ऑनलाइन सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई से जुड़े रहे। उसके बाद जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के सामने अपनी बात रखना चाहते थे, मगर उसको मौका नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि वह मीडिया के माध्यम से पूरे देश के सामने रख दी जाए

मीडिया के माध्यम से सरदार जगजीत सिंह की बात

एमएसपी गारंटी कानून समेत 13 मांगों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) एवं किसान मजदूर मोर्चा के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन के तहत उनके आमरण अनशन का वीरवार को 24वां दिन है। उन्होंने कहा कि उनको खबरों से पता चला कि वह मेरे स्वास्थ्य को लेकर काफी चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि अब तो खेती के विषय पर बनी संसद की स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट (पहला वॉल्यूम, पॉइंट 7, पेज 54) पर स्पष्ट कर दिया है कि एमएसपी गारंटी कानून बनाया जाना चाहिए और इससे किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं देश को बहुत फायदा होगा। एमएसपी गारंटी कानून से किसानों की क्रय शक्ति बढ़ेगी। इससे देश की अर्थव्यवस्था को बहुत फायदा होगा। यह सर्वदलीय कमेटी है। इसमें सभी राजनीतिक पार्टियों की तरफ से 31 सांसद शामिल हैं। उन्होंने कहा कि वह निवेदन करते हैं कि आप केंद्र सरकार को निर्देश दें कि संसद की कमेटी की रिपोर्ट एवं किसानों की भावनाओं का सम्मान करते हुए एमएसपी गारंटी कानून बनाया जाए, इससे किसानों की आत्महत्या बंद हो सके। हम जिन मुद्दों पर आंदोलन कर रहे हैं, यह सिर्फ हमारी मांगें नहीं हैं, बल्कि अलग-अलग सरकारों की तरफ से किए गए वादे हैं। 2011 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए उपभोक्ता मामलों की कमेटी के चेयरमैन थे, तो उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को रिपोर्ट भेजकर कहा था कि किसी भी व्यापारी की तरफ से किसी भी किसान की फसल सरकार द्वारा निर्धारित एमएसपी से नीचे नहीं खरीदी जानी चाहिए और इसके लिए कानून बनाना चाहिए, लेकिन 2014 में सत्ता में आने के बाद पीएम मोदी ने अब तक खुद की सिफारिश लागू नहीं की। किसानों की आत्महत्या रोकने के लिए बनाए गए डॉ. स्वामीनाथन आयोग ने 2006 में अपनी रिपोर्ट दी। 2014 तक यूपीए की सरकार सत्ता में रही, लेकिन उन्होंने रिपोर्ट लागू नहीं की। 2014 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी ने वायदा किया था, कि वह प्रधानमंत्री बने तो स्वामीनाथन आयोग के C2+50% फॉर्मूले के अनुसार फसलों का एमएसपी तय करेंगे। 2014 में सत्ता में आने के बाद 2015 में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने हलफनामा देकर कहा कि वह स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू नहीं कर सकते हैं। 2018 में पंजाब की चीमा मंडी में 35 दिन धरना देने के बाद में अन्ना हजारे एवं जगजीत सिंह डल्लेवाल ने दिल्ली के रामलीला मैदान में आमरण अनशन किया था, उस समय तत्कालीन कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह एवं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा हस्ताक्षरित चिट्ठी आंदोलनकारी नेताओं को सौंपी थी। इसमें साफ तौर पर लिखा था कि केंद्र सरकार तीन महीने में स्वामीनाथन आयोग के C2+50% फॉर्मूले को लागू करेगी, लेकिन छह साल बीत जाने के बावजूद आज तक उसे लागू नहीं किया गया। 2020-2021 में 378 दिनों तक चले आंदोलन को स्थगित करते समय नौ दिसंबर 2021 को एक चिट्ठी कृषि मंत्रालय द्वारा हमें सौंपी गई थी। इसमें हर किसान के लिए एमएसपी सुनिश्चित करने, खेती कार्यों को प्रदूषण कानून से बाहर निकालने, लखीमपुर खीरी के घायलों को उचित मुआवजा देने, बिजली बिल को संसद में पेश करने से पहले किसानों से चर्चा करने एवम आंदोलनकारी किसानों पर आंदोलन संबंधी मुकदमे वापस लेने समेत कई लिखित वादे किए गए थे, जो आज तक अधूरे हैं।

19जेएनडी01: किसान नेता जगजीत डल्लेवाल की खराब हुई तबीयत के दौरान संभाल करते किसान। स्रोत किसान

19जेएनडी01: किसान नेता जगजीत डल्लेवाल की खराब हुई तबीयत के दौरान संभाल करते किसान। स्रोत किसान

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें