नरवाना (जींद)। खनौरी बाॅर्डर पर किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के आमरण अनशन को किसान संगठनों का साथ मिल रहा है। अब तक किसी भी संगठन ने उनके समर्थन में आंदोलन में भागीदारी नहीं दिखाई, लेकिन किसान संगठन व खाप नेता धरने का समर्थन लगातार कर रहे हैं। मंगलवार को भी कुछ किसान संगठनों ने समर्थन देते हुए केंद्र सरकार से जल्द बातचीत करने के लिए चेताया है। उधर, हालात नाजुक होने के कारण डल्लेवाल मंच पर नहीं बोल सके।
धरने पर 16 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट की ओर से बनाई गई कमेटी से दोनों मोर्चाें को एक चिट्ठी मिली। इसमें 18 दिसंबर को पंचकूला में बैठक के लिए बुलाया गया, लेकिन बाॅर्डर पर दोनों मोर्चों ने आपसी विचार-विमर्श के बाद कमेटी के साथ बैठक में नहीं जाने का फैसला लिया और कमेटी को लिखित चिट्ठी भेज दी।
किसान नेता डल्लेवाल की तरफ से भेजी चिट्ठी में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त कमेटी अध्यक्ष नवाब सिंह से बैठक के विषय में पत्र मिला। कमेटी सुप्रीम कोर्ट की ओर से किसानों व सरकारों में विश्वास बहाली करने के लिए बनाई गई थी, लेकिन उसके लिए कोई ठोस प्रयास अब तक नहीं किए और न ही जायज मांगों को पूरा करवाने के लिए केंद्र सरकार से बातचीत का कोई गंभीर प्रयास किया।
सिर्फ औपचारिकता के लिए बनाई जाती हैं कमेटियां...
किसान नेता का आरोप है कि दोनों मोर्चों को पहले से ही अंदेशा था कि कमेटियां सिर्फ औपचारिकता के लिए बनाई जाती हैं, लेकिन उसके बावजूद उन्होंने सब का सम्मान करते हुए अपनी तरफ से प्रतिनिधिमंडल चार नवंबर को भेजा था, लेकिन इतनी गंभीर स्थिति होने के बावजूद कमेटी अब तक खनौरी व शंभू मोर्चों पर आने का समय नहीं निकाल पाई। क्या यह कमेटी उनकी मृत्यु का इंतजार कर रही थी, कमेटी के सभी सम्मानित सदस्यों की तरफ से इतनी संवेदनहीनता की उम्मीद उनको नहीं थी। अब उनकी मेडिकल रिपोर्ट और शंभू बॉर्डर पर घायल किसानों की हालत को देखते हुए दोनों मोर्चो ने फैसला लिया है कि वह उनके साथ बैठक करने में असमर्थ हैं। अब वह अपनी मांगों पर सिर्फ केंद्र सरकार से ही बातचीत करेंगे।