नरवाना। ग्रामीण क्षेत्र में संसाधनों की कमी के बावजूद यदि इरादे बुलंद और सामूहिक प्रयास हो तो बदलाव होता है। इसका जीवंत उदाहरण बेलरखा गांव की दादा खेड़ा लाइब्रेरी है जो आज क्षेत्र के सैकड़ों युवाओं के सपनों को पंख दे रही है।
हाल ही में इस लाइब्रेरी से पढ़ाई कर 54 विद्यार्थियों ने सीईटी परीक्षा पास कर गांव और क्षेत्र का नाम रोशन किया है जबकि बीते चार वर्षों में करीब 15 युवाओं का सरकारी नौकरी में चयन हो चुका है। यह लाइब्रेरी दादा खेड़ा वेलफेयर ट्रस्ट की देखरेख में संचालित की जा रही है। इसकी शुरुआत एक जनवरी 2022 को गांव के सामूहिक सहयोग से की गई थी। उस समय पूरे गांव ने आपसी सहयोग से धन एकत्र कर लाइब्रेरी की नींव रखी थी।
आज यह लाइब्रेरी न केवल बेलरखा बल्कि आसपास के गांवों के युवाओं के लिए भी शिक्षा का केंद्र बन चुकी है। हमीरगढ़ और सुरजाखेड़ा जैसे गांवों से भी छात्र-छात्राएं यहां नियमित रूप से पढ़ने के लिए आते हैं। लाइब्रेरी में 75 से अधिक सीटों की व्यवस्था है। इनमें 40 सीटें छात्राओं और 35 सीटें छात्रों के लिए निर्धारित की गई हैं।
प्रतिदिन यहां 100 से अधिक विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। हाल ही में घोषित सीईटी परिणामों में 54 बच्चों की सफलता ने लाइब्रेरी की उपयोगिता और गुणवत्ता को साबित कर दिया है।
दादा खेड़ा वेलफेयर ट्रस्ट के सदस्य मास्टर सुरेंद्र ने बताया कि गांव के अवि सिमर का ग्राम सचिव पद पर चयन हुआ है जबकि राकेश का चयन पीजीटी फिजिकल एजुकेशन के पद पर हुआ। कई युवा क्लर्क, ग्रुप-डी और ग्रुप-सी पदों पर सेवाएं दे रहे हैं। अक्टूबर 2025 तक लाइब्रेरी निःशुल्क चलाई गई। अब विद्यार्थी इच्छा से 200 रुपये प्रतिमाह दान के रूप में सहयोग कर रहे हैं। लाइब्रेरी में वाई-फाई, स्वच्छ पेयजल, शौचालय, सोलर पैनल और इन्वर्टर जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं।
वज्रन
अब गांव की चौपाल में लाइब्रेरी बनाना और बच्चों को पढ़ाई के प्रति जागरूक करना गांव के लिए बहुत बड़ी बात है। यदि हर गांव में इस प्रकार से लाइब्रेरी का निर्माण कर बच्चों का भविष्य सुरक्षित किया जाए तो बच्चे आगे बड़े-बड़े पदों पर बैठकर क्षेत्र का ही नहीं हरियाणा का भी नाम रोशन करेंगे।–बलजीत सिंह गोयत, प्रधानाचार्य, संस्कृति मॉडल स्कूल बेलरखा।