कैंटीन के गेट पर कर्मचारी के साथ बहस करते पूर्व सैनिक।
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जींद। दो महीने के बाद शुक्रवार से सीएसडी कैंटीन खुल गई। यहां सामान को लेकर कुछ पूर्व सैनिकों ने हंगामा किया। हालांकि पहले ही 80 लोगों को टोकन देकर प्रवेश दिया गया। जिन लोगों को प्रवेश नहीं मिल पाया, उनका आरोप है कि टोकन लेने के लिए जो मोबाइल नंबर जारी किया गया है, उस पर कोई व्यक्ति जवाब नहीं दे रहा है। इसको लेकर हंगामा किया।
दरअसल सीएसडी कैंटीन में शारीरिक दूरी रखते हुए सामान खरीदने के लिए व्यवस्था बनाई गई है। इसके लिए एक दिन में 80 लोगों को ही बुलाया जा रहा है। इस दौरान कैंटीन के गेट पर कुछ लोगों ने प्रवेश नहीं होने पर रोष जताया। लोगों ने कहा कि यहां उनकी बात सुनने वाला तक कोई नहीं है। वहीं कैंटीन में प्रवेश के लिए टोकन दिखाकर लोगों को अंदर भेजा जाता है। इसके लिए यहां पुलिसकर्मियों के साथ-साथ कैंटीन कर्मचारियों को भी तैनात किया गया है। इन कर्मचारियों ने कहा कि लोग उन्हें बहुत बुरा भला कह रहे हैं, जबकि यह व्यवस्था सभी के लिए है।
नहीं मिल रहा सामान
कैंटीन दो महीने बाद खुली है, लेकिन सामान नहीं मिल रहा है। यहां बताया जा रहा है कि 28 मई तक के टोकन जारी किए जा चुके हैं। नए टोकन के लिए फोन नहीं उठाते। अगले महीने में फिर से उन्हीं लोगों को सामान दे दिया जाएगा।
राममेहर, पूर्व सैनिक।
बदतमीजी करते हैं कर्मचारी
पूर्व सैनिकों को धूप व गर्मी में परेशान किया जा रहा है। यहां टोकन से सामान देने की बात कही जा रही है और टोकन दिया नहीं जा रहा है। इतना ही नहीं कैंटीन के कर्मचारी बदतमीजी करते हैं।
दिलबाग, पूर्व सैनिक।
19 हजार सैनिक व पूर्व सैनिक
जिला में 19 हजार लोग सैनिक या पूर्व सैनिक कैंटीन से पंजीकृत हैं। मुख्यालय से दो काउंटर खोलने की अनुमति मिली थी, लेकिन लोगों की संख्या को देखते हुए एक अतिरिक्त काउंटर खोलने की भी अनुमति ली गई है। साथ ही सरकार की हिदायतें साफ हैं कि पहले कोरोना से बचाव करना है। इसके लिए ही पूरी व्यवस्था की गई है। 28 मई तक के टोकन दिए गए हैं। 29 से 31 मई तक कैंटीन बंद रहेगी। इसके बाद आगे का फैसला होगा।
- कर्नल ओमप्रकाश, कैंटीन मैनेजर।