जींद/उचाना। नवरात्र की अष्टमी पर कन्याओं को भोजन करवा कर मां के भक्तों ने अपने व्रत को पूरा किया। जगह-जगह कन्याओं को अष्टमी पर भोजन करवा कर विद्यार्थियों को नवरात्र के महत्व के बारे में बताया गया।
शास्त्रों में कन्या पूजन का विशेष महत्व बताया गया है। बिना कन्याओं को भोजन करवाए नवरात्र में किए गए व्रतों को पूरा नहीं माना जाता है। जो भक्त नौ दिनों तक माता रानी का व्रत रखते हैं, वह कन्या पूजन के बाद अपना व्रत खोलते हैं। वैसे तो नवरात्र में कन्या पूजन किसी भी दिन किया जा सकता है, लेकिन अष्टमी और नवमी के दिन करना ज्यादा श्रेष्ठ माना जाता है। शास्त्रों में कन्या पूजन को विशेष महत्व दिया गया है। कन्या पूजन के दौरान 9 कन्याओं को माता के नौ स्वरूप मानकर पूजा की जाती है, उनके साथ ही एक बालक को भी भोज कराया जाता है, जिसे भैरव बाबा का रूप माना जाता है। उस बालक को लांगुर कहा जाता है। कहा जाता है कि कन्याओं के साथ लागुंर को भोजन कराने के बाद ही कन्या पूजन पूरी तरह सफल होता है।
मां सबकी सृजनहार : पवन
वहीं माता वैष्णवी धाम में आयोजित नवार्ण महायज्ञ के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए आचार्य पवन शर्मा ने कहा कि जर्रे-जर्रे में मां का वास है। वही सबकी सृजनहार हैं। वही सबकी पालनहार, वही है सबकी तारनहार भी हैं। सबके हृदय की धड़कन, वही ऊर्जा के रूप में पूरे शरीर में प्रवाहित हो रही हैं। जब वही सब कुछ कर रही हैं, तो फिर नफरत किससे। इस मौके पर विधायक डॉ. कृष्ण मिड्ढा व राजन चिल्लाना ने मां के चरणों में पुष्प अर्पित किया।