जींद। सरकार और आढ़तियों के गेहूं खरीद के निर्णय पर किसान पीस रहा है। कहने को तो पिछले सात दिन से मंडी में खरीद का कार्य सुचारू रुप से चल रहा है, लेकिन इन सात दिनों में मंडी में आया 70 किसानों का लगभग आठ हजार क्विंटल गेहूं बिकने का इंतजार कर रहा है। किसी भी किसान का गेहूं किसी भी खरीद एजेंसी ने इन सात दिनों में नहीं खरीदा। इसके चलते अब तक किसान मंडी में गेहूं की ढेरी उतारकर वापस घर जा रहे हैं।
मंडी में खरीद प्रक्रिया किसान की ट्राली का गेट पास कटने तक सीमित है। इससे आगे न तो खरीद एजेंसी के अधिकारी व कर्मचारी मंडी में किसी गेहूं की ढेरी के पास आकर नमी की जांच करते और न ही मंडी में कोई गेहूं तोलने के लिए मजदूर दिखाई देता। इसका मुख्य कारण आढ़ती व सरकार के मध्य मांगों को लेकर चल रहा विवाद है। मंडी में गेहूं खरीद के दावे जिला प्रशासन के बड़े अधिकारी भी आए दिन कर रहे हैं, लेकिन यह दावे सरकार व किसान को गुमराह करने वाले हैं। अब तक मार्केट कमेटी के रिकार्ड से लेकर किसी भी खरीद एजेंसी के रिकार्ड में गेहूं नहीं खरीदा गया, बल्कि मार्के ट कमेटी गेट पास काटने तक ही सीमित बनी हुई है। प्रदेश सरकार के दावों के अनुसार मंडियों में एक अप्रैल से गेहूं खरीद का कार्य चल रहा है, लेकिन प्रशासन के रिकार्ड में गेहूं का एक भी दाना किसी खरीद एजेंसी ने नहीं खरीदा। इस रिकार्ड को देखकर जिला स्तर पर बैठे बड़े प्रशासनिक अधिकारी भी नजरअंदाज कर रहे हैं।
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किसान गेहूं की ढेरी को उतार वापस जाने को मजबूर
पिछले सात दिनों में मंडी में 50 से ज्यादा किसान गेहूं लेकर पहुंचे हैं जिनका मंडी में लगभग छह हजार क्विंटल गेहूं रामभरोसे पड़ा है। पिछले कई दिनों से मौसम खराब चल रहा है, लेकिन किसान के इस सोने के खराब होने का डर न तो खरीद एजेंसियों को है, न मंडी प्रशासन और न जिला प्रशासन को।
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आढ़तियों की हड़ताल के चलते नहीं हो रही खरीद : डीसी
नमी के चलते पहले दो दिन आढ़तियों ने खरीद नहीं करने को कहा था। इसके बाद सहयोग नहीं मिला। आढ़तियों की हड़ताल के चलते मंडी में अब तक खरीद शुरू नहीं हो पाई है। वेयर हाउस को खरीद करने के निर्देश दिए हैं। अब मंडी में जो भी निजी संस्था गेहूं की खरीद में सहयोग करने के लिए आगे आएगी उसको अस्थायी लाइसेंस मार्केट कमेटी की तरफ से दिया जाएगा। किसानों के गेहूं खरीद के लिए प्रशासन हर चुनौती से निपटने के लिए तैयार है।
--डॉ. आदित्य दहिया, डीसी।
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190 किसानों के कटे गेट पास
उचाना। बुधवार को मार्केट कमेटी द्वारा किसानों के 190 गेट पास काटस्त्रत्त्े गए। हैफेड द्वारा बुधवार को खरीद की गई। उचाना हैफेड वरिष्ठ प्रबंधक संदीप पूनिया के साथ मार्केट कमेटी विभाग के कर्मचारी मौजूद रहे। मार्केट कमेटी सचिव नरेंद्र कुंडू ने बताया कि जिन किसानों ने मेरी फसल, मेरा ब्यौरा के तहत पंजीकरण करवाया है वह भी गेहूं बेचने के लिए मंडी में आ सकते हैं। बिना पंजीकरण के गेहूं नहीं खरीदा जाएगा। इस मौके पर सज्जन चौधरी, बिरखा गर्ग, लीला घोघडिय़ां, रमेश गुरूकुल खेड़ा, सतीश नचार, ज्ञानी उचाना खुर्द, हरिओम डूमरखां मौजूद रहे।
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आढ़ती एसोसिएशन ने बैठक करके बनाई रणनीति
जुलाना। मंडी में गेहूं की आवक शुरू हो चुकी है। आढ़ती एसोसिएशन ने बुधवार को बैठक करके रणनीति बनाई। बैठक में फैसला लिया गया कि जब गेहूं के बैग भरकर ट्रक जाएगा तो उसका वजन मंडी में करवाया जाएगा। इसके बाद वजन कम हुआ तो ट्रक चालक इसके लिए जिम्मेदार होगा। खरीद एजेंसी के अधिकारी को मंडी में ही गेहूं की ढेरी या कट्टों का निरीक्षण करना होगा तथा गेहूं के कट्टे ट्रक में लोड करवाने होंगे। ट्रक मंडी से निकलने के बाद आढ़तियों की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। बैठक की अध्यक्षता पूर्व प्रधान मनोज ढिगाना ने की।
मनोज ढिगाना ने कहा कि मंडी से गोदाम तक कट्टों से भरा ट्रक ले जाने में कई बार चालक हेराफेरी कर देता है और गाड़ी का वजन घट जाता है। इसका खामियाजा बाद में आढ़ती को भुगतना पड़ता है। अबकी बार जुलाना की नई अनाज मंडी में ही गाड़ी का वजन करवाया जाएगा। क्वालिटी के नाम पर आढ़ती को तंग किया जाता है। अबकी बार आढ़ती यह सहन नहीं करेंगे। खरीद एजेंसी अधिकारी को मंडी में ही कट्टों का निरीक्षण करना होगा। गोदाम में गाड़ी पहुंचने के बाद आढ़ती की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। बैठक में आढ़ती एसोसिएशन के जिला प्रधान राजपाल, राजेश, जोनी, परमेंद्र भी मौजूद रहे।