राजकीय प्राथमिक पाठशाला ऐचरां कलां में अध्यापक की जगह पर दूसरी महिला को ड्यूटी देते मिली। जांच में फर्जीवाड़ा सामने आया कि प्राइमरी टीचर देवेंद्र खुद स्कूल में नहीं आता था और अपनी जगह पर एक महिला को बच्चों को पढ़ाने के लिए भेजता था और प्रति माह तीन हजार रुपये देता था। अध्यापक का यह फर्जीवाड़ा शनिवार को खंड शिक्षा अधिकारी डॉ. नरेश वर्मा के औचक निरीक्षण के दौरान सामने आया। खंड शिक्षा अधिकारी ने स्कूल में ड्यूटी दे रही महिला से पूछताछ की और उसके बाद इसकी रिपोर्ट बनाकर विभाग को उच्च अधिकारियों को भेज दिया।
खंड शिक्षा अधिकारी डॉ. नरेश वर्मा ने बताया कि शनिवार को क्षेत्र के राजकीय स्कूलों का औचक निरीक्षण किया। जहां पर टीम ने स्कूलों मेें उपस्थित अध्यापक और रजिस्टरों की जांच की गई। इसमेें गांव ऐचरां खुर्द के राजकीय प्राथमिक पाठशाला में गांव की एक महिला अध्यापिका के तौर कक्षा लगाएं पाई गई। जिसे स्कूल के ही एक अध्यापक देवेंद्र द्वारा उसे प्रति माह तीन हजार रुपये में रखने की बात सामने आई। टीम ने फर्जी अध्यापिका से पूछताछ कर स्कूल के मुख्याध्यापक को कारण बताओ नोटिस जारी किया।
महिला को स्कूल में क्यों रखा गया और किसके द्वारा रखा गया, इसकी भी जांच करने के आदेश दिए है। वहीं पूछताछ के बाद महिला को स्कूल से निकाल दिया गया। इस निरीक्षण के दौरान टीम के गांव सरफाबाद, ऐंचरा कलां व हरिगढ के स्कूलों में पहुंची। इनमेें अन्य सभी स्कूलों के अध्यापकों बच्चों के दाखिला करते हुए पाया गया। तो वहीं ऐचरा खुर्द कई खामियां के साथ अध्यापकों की मनमानी भी नजर आई। ऐंचरा खुर्द स्कूल में मिड-डे मील का रिकॉर्ड पूरा नहीं पाया, वहीं स्कूल में एक अध्यापिका भी हाजिरी लगाकर गायब पाई।
विभाग की अनुमति के बिना कर रही थी कार्य
बीइओ डॉ. नरेश वर्मा ने बताया कि महिला को स्कूल के एक अध्यापक देवेंद्र ने बिना विभाग की अनुमति के रखा है। पिछले चार माह से स्कूल में पढ़ा रही महिला ने बताया कि उसे देवेंद्र ने 3000 प्रतिमाह देने के अलावा अनुभव प्रमाण पत्र देने की भी बात कही थी। उसे नहीं पता है कि देवेंद्र ने इसकी अनुमति ली है या नहीं।
बिना रजिस्ट्रेशन वाले स्कूल के 41 बच्चे मिले परीक्षा देते
बीईओ की जांच के दौरान सफीदों के गुरु गोबिंद सिंह स्कूल में चल रहे परीक्षा केंद्र में भी फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां तीन ऐसे स्कूलों के बच्चे दूसरे स्कूल के नाम से परीक्षा देते मिले, जिनके स्कूल रजिस्टर्ड ही नहीं हैं। यहां परीक्षा दे रहे विद्यार्थियों से जब बीईओ ने उनके स्कूल प्रिंसिपल के नाम पूछे तो बच्चे नहीं बता पाए। जांच में पता चला कि यहां तीन स्कूलों के बच्चे किसी दूसरे स्कूल के नाम से बोर्ड में पंजीकृत करवाए गए हैं। बीईओ के अनुसार इन तीनों स्कूलों के संचालकों को नोटिस भेजकर कर जवाब मांगा जाएगा।
परीक्षा के दौरान बने पांच यूएमसी
शनिवार को हुई परीक्षा के दौरान शिक्षा विभाग ने पांच विद्यार्थियों को नकल करते पाया। ऐसे में इनके खिलाफ यूएमसी बना दिए। जिला शिक्षा अधिकारी वंदना गुप्ता के अनुसार पिल्लूखेड़ा के हिंदू कन्या स्कूल में तीन और पिल्लूखेड़ा के ही लड़कों के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में दो केस बनाए गए हैं।