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खटकड़ में क्रमिक अनशन शुरू

Tue, 14 Jun 2016 12:43 AM IST
जींद ब्यूरो/ अमर उजाला
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खटकड में धरने पर बैठी महिलाएं। - फोटो : amar ujala
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फरवरी में हुए जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान जाट नेताओं व युवकों के खिलाफ दर्ज केस वापस लेने और जाटों को आरक्षण की मांग को लेकर अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति द्वारा नौवें दिन भी धरना जारी रखा गया। इस दौरान पांच जाट नेता क्रमिक अनशन पर भी बैठे। हालांकि समिति नेताओं ने सोमवार से जुलाना और नरवाना में भी धरने का ऐलान किया था, लेकिन प्रशासन धरना स्थल पर सहमति नहीं बनने के कारण धरने शुरू नहीं किए गए। अब एक कमेटी जुलाना और नरवाना में धरना स्थाल तय करेगी।
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धरने का नौवां दिन जैसे महिलाओं के नाम रहा। दो महिला वक्ताओं ने जहां जाट आरक्षण आंदोलन का समर्थन नहीं करने वाले जाट नेताओं को आड़े हाथों लिया, वहीं समिति के जिलाध्यक्ष कैप्टन भूपेंद्र ने राजनेताओं और खाप नेताओं को भी आंदोलन का समर्थन करने का आह्वान किया। कैप्टन भूपेंद्र ने कहा कि 13 जून के बाद कुछ नेता और खाप प्रतिनिधि आंदोलन तय करने की बात कह रहे थे, लेकिन अब 13 जून भी आ गई है, लेकिन ये लोग मौन हैं। यदि राजनेता जाट आंदोलन का समर्थन नहीं करते तो गांवों में उनका बहिष्कार किया जाएगा।

ड्रांइगरूम की राजनीति छोड़े सरकार
धरने के दौरान युवती तमन्ना ने सरकार पर जमकर निशाना साधा। तमन्ना ने कहा कि सरकार ड्राइंग रूम की राजनीति कर रही है। सरकार को पता ही नहीं कि धरातल पर क्या हो रहा है। सरकार जाटों को प्रताड़ित करने का काम कर रही है। सरकार को जाट युवाओं पर बनाए गए केस वापस लेने के साथ-साथ आंदोलन में मारे गए लोगों मुआवजा देना चाहिए।
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पांच लोगो ने शुरू  किया क्रमिक अनशन
तय कार्यक्रम के अनुसार सोमवार से पांच लोगों ने क्रमिक अनशन शुरू कर दिया। इसमें सेवानिवृत्त सिविल सर्जन डॉ. किताब सिंह श्योकंद, रणधीर सिंह चहल, आजाद सिंह, जयनारायण व नफे सिंह ने पहले दिन अनशन किया।

ब्लॉक स्तर के धरनों पर अटकी बात
ब्लॉक स्तर पर धरने के लिए प्रशासन ने जो स्थान सुझाए हैं, वे शहरों के नजदीक हैं और समिति शहरों के नजदीक धरना नहीं देना चाहती। ऐसे में संघर्ष समिति द्वारा एक कमेटी का गठन किया गया है, जो जुलाना और नरवाना में धरने के स्थान की संभावनाएं टटौलेगी। इसके बाद प्रशासन को अनुमति के लिए पत्र लिखा जाएगा।
कैप्टन रणधीर सिंह चहल, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति

कानून व्यवस्था प्राथमिकता
प्रशासन के लिए जिला की कानून व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है। हर फैसला इसको ध्यान में रखकर ही किया जाएगा। प्रशासन को लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ-साथ व्यवस्था को भी देखना है।
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विनय सिंह, डीसी जींद।
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