जेल में कैदी की हृदय गति रुकने से मौत
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। जिला कारागार में नशीले पदार्थ तस्कर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। कैदी की मौत की सूचना पाकर पुलिस और परिजन मौके पर पहुंचे। जहां पर परिजनों ने जेल प्रशासन ने कैदी के इलाज में लापरवाही बरतने के आरोप लगाए। पुलिस ने मृतक के शव का नागरिक अस्पताल में ले आई। जहां पर चिकित्सकों के बोर्ड ने मृतक के शव का पोस्टमार्टम किया।
पुलिस के अनुसार विश्वकर्मा कालोनी निवासी 50 वर्षीय सुशील नशीले पदार्थ तस्करी के जुर्म में दस साल की कैद काट रहा है। रविवार सुबह अचानक तबीयत बिगड़ गई। जेल प्रशासन ने तुरंत ही उसे उपचार के लिए नागरिक अस्पताल में दाखिल करवाया गया। जहां से चिकित्सकों ने उसकी गंभीर हालात देखते हुए पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया, लेकिन रास्ते में सुशील की मौत हो गई। नागरिक अस्पताल में पहुंची मृतका की पत्नी सुनीता ने आरोप लगाया कि उसके पति की जेल प्रशासन की लापरवाही के चलते मौत हुई है। उसके पति का पीजीआई रोहतक में इलाज चल रहा है और चिकित्सकों ने बाईपास सर्जरी करवाने के लिए कहा था। इस पर पीजीआई प्रशासन ने जेल प्रशासन को कैदी के इलाज के लिए एक लाख 17 हजार रुपये जमा करवाने के लिए कहा था, लेकिन जेल प्रशासन ने उसको अनदेखा कर दिया। इसके चलते उसके पति की इलाज के अभाव में मौत हुई है। जेल उपाधीक्षक राकेश कुमार ने कहा कि जेल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप गलत है। पिछले दिनों सुशील 40 दिन के लिए मेडिकल जांच के लिए पैरोल पर गया था, लेकिन उसने वहां पर इलाज नहीं करवाया।
सिविल लाइन थाना प्रभारी दिनेश कुमार ने बताया कि मृतक के परिजनों के बयान जज ने कलमबद्ध किए है। उनको जैसे भी आदेश प्राप्त होंगे उसी के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।