संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। बीड़ बड़ा वन के पास बनी सुनंदी गोशाला में गोवंश के हालात बद् से बद्तर बने हुए हैं। हर रोज कई-कई गोवंश मौत का ग्रास बन रहे हैं, जिनको दफनाया भी नहीं बल्कि खुले में फें का जा रहा है। ऐसे में गोशाला के पास बदबूदार वातावरण बना हुआ है। आवारा कु त्ते मरे हुए गोवंश के अवशेषों को उठाकर सडक़ों तक ला रहे हैं। हालांकि बीड़ बड़ा वन की सुनंदी गोशाला का डीसी और नगराधीश भी दौरा कर चुके हैं। उन्होंने दौरा कर गोशाला की व्यवस्थाओं को सही बताया था। वहां के कर्मचारियों को दिशा-निर्देश भी दिए थे। इसके अलावा बीमार गोवंश को बचाने के लिए भी पशुपालन विभाग से एक चिकित्सक की प्रतिदिन डयूटी लगाई गई थी। अब गोवंश भूख और बीमारियों के कारण दम तोड़ रहे हैं। सुनंदी नंदीशाला में पिछले महीने जहां 800 के लगभग गोवंश थे, वह अब घटकर 750 रह गए हैं। इस गोशाला में गोवंश का पेट ही नहीं भर पा रहा है, क्योंकि वहां पर न तो कोई शहरवासी चारा डालने के लिए जा रहा है और न ही गोशाला कमेटी के पास इतनी राशि नहीं है कि वह चारा खरीदकर गोवंश का पेट भर सके। ऐसे में हर रोज गोवंश की मौत हो रही है।
डीसी और नगराधीश ने किया था दौरा
अमर उजाला की टीम ने दिसंबर महीने में गोशालों के बद्तर हालात को प्रमुखता से उठाया था। उसके बाद नगराधीश अमित कुमार ने बीड़ बड़ा वन की सुनंदी गोशाला का दौरा किया था। उन्होंने वहां जाकर गोवंश के हालात देखे थे वहीं गोवंश के लिए बचे हुए चारे बारे भी प्रबंधन सदस्यों से बातचीत की थी। उन्होंने कहा था कि वह गोवंश का पेट भरने के लिए शहरवासियों से अपील करेंगे कि वह गोवंश की सेवा के लिए आगे आएं, लेकिन प्रशासन की अपील का शहरवासियों पर कुछ असर नहीं हुआ। अब गोवंश भूखा मरने पर मजबूर है। इसके अलावा पिछले सप्ताह डीसी डॉ. मनोज ने भी गोशालाओं का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया था। डीसी ने गोशालाओं की व्यवस्थाओं को सही बताया था, लेकिन बीमारी और भूख से हर रोज कई-कई गोवंश दम तोड़ रहे हैं।
4 कर्मचारियों पर 830 गोवंश का जिम्मा
सुनंदी गोशाला में लगभग 750 गोवंश हैं। इनका जिम्मा चार कर्मचारियों पर है। ऐसे में गोवंश का रख-रखाव सही तरीके से नहीं हो पा रहा। इसको प्रशासन ने भी माना था। गोवंश के चारे की उचित व्यवस्था नहीं बन पाती और न ही बीमार गोवंश का अच्छे ढंग से ध्यान रखा जाता। बीमार गोवंश को चारा खिलाने और पानी पिलाने की व्यवस्था नहीं बनती। ऐसे में बीमार गोवंश भूख और प्यास से ही दम तोड़ देता है।
बीड़ बड़ा वन में दूसरी गोशालाओं से भी मृत गायों को दफनाया जाता है। शनिवार को सुनंदी गोशाला में भी कई गोवंश की मौत हो गई थी। जेसीबी खराब होने से सभी गोवंश के ऊपर मिट्टी नहीं डल पाई थी।
--स्वामी राघवानंद, अध्यक्ष, नंदीशाला कमेटी जींद।