सफीदों। शहर के प्रमुख स्थल महाराजा अग्रसेन चौक के सामने स्थित गोल चक्कर पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा लगाने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। समाजसेवी व पूर्व पार्षद प्रवीन बंसल ने नगरपालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने अग्रवाल समाज से जुड़े मौजूदा पार्षदों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं।
प्रवीन बंसल ने कहा कि नगरपालिका में कोई भी प्रस्ताव हाउस की मंजूरी के बाद ही पारित होता है। ऐसे में जब महाराजा अग्रसेन चौक की पहचान और गरिमा को प्रभावित करने वाला प्रस्ताव सदन में लाया गया, तब अग्रवाल समाज के तीनों पार्षदों ने उसी समय इसका विरोध क्यों नहीं किया? उन्होंने कहा कि यदि उस वक्त सदन में आपत्ति दर्ज कराई जाती तो शायद वर्तमान स्थिति पैदा नहीं होती।
बंसल ने आरोप लगाया कि पूरा घटनाक्रम एक सुनियोजित योजना का हिस्सा नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि नगरपालिका द्वारा जल्दबाजी में गोल चक्कर पर नया स्ट्रक्चर तैयार किया गया, जिससे संकेत मिलता है कि किसी अन्य प्रतिमा की स्थापना की तैयारी पहले से चल रही थी।
उन्होंने बताया कि करीब 25 वर्ष पहले अग्रवाल समाज के वरिष्ठ लोगों ने पुराने बस स्टैंड के पास महाराजा अग्रसेन चौक का निर्माण कराया था। यह चौक आज केवल समाज विशेष की पहचान नहीं बल्कि पूरे शहर की सामाजिक और ऐतिहासिक धरोहर बन चुका है।
प्रवीन बंसल ने स्पष्ट किया कि अग्रवाल समाज किसी अन्य समाज या महापुरुष के सम्मान के खिलाफ नहीं है लेकिन किसी ऐतिहासिक स्थल की गरिमा को प्रभावित करना स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि तैयार किए गए स्ट्रक्चर को हटाकर वहां महाराजा अग्रसेन के सिद्धांत ‘एक रुपया-एक ईंट’ के प्रतीक चिन्ह की स्थापना की जाए, जिससे चौक की महत्ता और बढ़ सके।