प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिर्फ अपने मन की बात करते हैं। कृषि विधेयक को लेकर किसान और आढ़ती आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री ने अभी तक उनके मन की बात नहीं की है। अभी तक सिर्फ एक ट्वीट किया है। इससे किसानों को विश्वास नहीं हो सकता। लोग प्रधानमंत्री पर विश्वास नहीं कर सकते। पहले भी कभी 15 लाख के नाम पर तो कभी दूसरे मामलों में जनता को बरगला रहे हैं। ऐसे में न्यूनतम समर्थन मूल्य की बात पर विश्वास नहीं है, क्योंकि कानून में इसका जिक्र नहीं है। यह बात कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने सोमवार को कृषि विधायक के विरोध में जींद में कांग्रेस पार्टी के प्रदर्शन के दौरान कही।
लघु सचिवालय के बाहर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने पहले कुमारी सैलजा के नेतृत्व में धरना दिया। इसके बाद प्रदर्शन करते हुए डीसी डॉ. आदित्य दहिया को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। सैलजा ने कहा कि केंद्र सरकार लोकतंत्र में विश्वास नहीं करती। यही कारण है कि दो विधेयक संसद में लाए नहीं, धकेले गए हैं। इन पर मतदान नहीं करवाया गया, ध्वनिमत से पारित करवा दिए गए। यहां तक कि संसद के कैमरे तक बंद करवा दिए गए। यह देश के लोकतंत्र व संसदीय प्रणाली पर कुठाराघात है। इस मौके पर सफीदों से कांग्रेस विधायक सुभाष गांगोली, अंशुल सिंगला, जगबीर ढिगाना, दीपक पिंडारा, धर्मेंद्र ढुल, प्रदीप गिल, महावीर कंप्यूटर, प्रमोद सहवाग, पूनम चौहान, पूर्व विधायक दयानंद शर्मा, सुरेश गोयत, ऋषिपाल हैबतपुर, जसबीर काजल व पूर्व विधायक सूबे सिंह पूनिया मौजूद रहे।
अकाली कर रहे ढोंग, हरियाणा वालों को सत्ता का लालच
सैलजा ने बिना नाम लिए सरकार की सहयोगी जेजेपी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पंजाब में किसानों का विरोध देखते हुए अकाली सिर्फ ढोंग कर रहे हैं। जब पूरा पंजाब इसके विरोध में उतर गया, तब जाकर इस्तीफा दिया गया है, लेकिन अभी भी सरकार में बने हुए हैं। साथ ही बिना नाम लिए उन्होेंने कहा कि हरियाणा वालों को तो सत्ता का लालच है। अभी भी कह रहे हैं कि देखेंगे। अब देखने को क्या रह गया है।
संगठन के बारे में पूछे गए सवाल का नहीं दिया जवाब
डीसी को ज्ञापन देने के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान जब कुमारी सैलजा कांग्रेस पार्टी के संगठन के बारे में पूछा गया तो वे इसे टाल गईं। उन्होंने कहा कि आज सिर्फ इसी विषय पर बात करनी हैं।
जींद से बताया खून का रिश्ता
कुमारी सैलजा ने कहा कि जींद से उनका खून का रिश्ता है। उनके पूर्वज जींद जिले के पालवां गांव के रहने वाले थे। इस दौरान स्थानीय कांग्रेसी नेताओं ने किसानों के मुद्दे को छोड़ कुमारी सैलजा के सामने चमकने का प्रयास किया। हालांकि कुमारी सैलजा ने पूरा फोकस राजनीतिक नहीं किसानों के मुद्दों पर ही रखा।