नगर परिषद का ढीला रवैया शहर के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। दरअसल नगर परिषद ने पिछले चार साल से शहर की जर्जर इमारतों का सर्वे ही नहीं कराया है। ऐसे में शहर के बीचों बीच कई ऐसे भवन हैं, जो बारिश के मौसम में आसपास के लोगों के लिए खतरे की घंटी बन सकते हैं। हालांकि यह काम मानसून से पहले हो जाना चाहिए था, लेकिन नगर परिषद के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। नियमानुसार नगर परिषद को हर साल बारिश के मौसम से पहले ऐसे भवनों का सर्वे करना होता है, जो पुराने और जर्जर हालत में हैं। इसके बाद जो भवन बारिश के मौसम में खतरा बन सकते हैं, उन्हें गिराने की प्रक्रिया होती है, लेकिन जींद नगर परिषद को इसकी चिंता नहीं है। बारिश का मौसम शुरू हो चुका है और नगर परिषद को शहर की जर्जर इमरतों का पता तक नहीं हैं।
पुराने शहर में अधिकतर कंडम इमारतें
शहर में करीब दर्जन भर ऐसी इमारतें हैं, जो बारिश के मौसम में गिर सकती हैं। हैरानी की बात है कि इनमें से अधिकतर इमारतों में वर्षों से कोई रहता तक नहीं और यह इमारतें पड़ोसियों के लिए खतरा बनी हुई हैं। इन इमारतों के आसपास रहने वालों की मानें तो अक्सर इन भवनों से ईंट या अन्य मलबा भी गिरता रहता है।
सैकड़ों वर्ष पुराने हैं भवन
जर्जर भवनों में से दखनिया मोहल्ला, तांगा चौक व पुराने किले के आसपास कुछ भवन तो ऐसे हैं, जो सैकड़ों वर्ष पुराने हैं। इसके बावजूद प्रशासन इन भवनों की सुध नहीं ले रहा है। जहां-जहां ऐसे भवन हैं, वहां गलियां इतनी संकरी हैं कि यदि कोई हादसा होता है तो यहां तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाएगा।
दखनिया मोहल्ला में कई भवन तो 100 साल से भी पुराने हैं। हालांकि उस समय ये भवन बहुत मजबूत बने थे, लेकिन अब देखरेख के अभाव में यहां खतरा बहुत बढ़ गया है। हर वक्त भय बना रहता है।
- अजमेर, दखनिया मंदिर
बच्चे भी नहीं खेल पाते
इमारत बहुत पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं। बारिश के मौसम में यहां मलबा गिरता रहता है। ऐसे में बच्चे भी गलियों में नहीं खेत पाते। खंडहर भवनों से जहरीले कीड़े व सांप भी निकलते रहते हैं। इस ओर प्रशासन को ध्यान देना चाहिए।
- मोनू
गिराए जाएं पुराने भवन
पुराने और जर्जर भवन शहर की सुरक्षा के लिए खतरा हैं। बैंक रोड पर कई भवन तो ऐसे हैं, यदि यहां हादसा होता है तो बहुत बड़ा रूप ले सकता है। कई ऐसे भवन तो ठीक नगर परिषद की नाक के नीचे हैं, फिर भी ध्यान नहीं दिया जाता।
नरेश, टाउनहॉल निवासी
हां ऐसे भवन लोगों की सुरक्षा में खतरा हैं। पीडब्ल्यूडी के विशेषज्ञों से ऐसे भवनों का सर्वे करवाया जाएगा और जो इमारत गिराने की स्थिति में होंगी, उन्हें गिराया जाएगा। जल्द कंडम भवनों की स्थिति पता लगाई जाएगी।
- हरदीप सिंह, कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद