02जेएनडी09,10, 11: नागरिक अस्पताल में बंदरों का आंतक। स्वास्थ्यकर्मी
- फोटो : अधिवेशन में रवाना होने से पहले जानकारी देते व्यापार मंडल के सदस्य।
जींद। नागरिक अस्पताल परिसर से बंदर पकड़ने के लिए स्वास्थ्य सुपरवाइजर संघ ने पांच वर्ष में नगर परिषद को 38 बार रिमाइंडर भेजे हैं। इसके बावजूद भी नप अस्पताल परिसर से बंदर पकड़ने के लिए गंभीर नहीं है। नप ही नहीं डीसी को भी पत्र लिखा जा चुका है लेकिन आज तक इस समस्या के समाधान के लिए सुनवाई करने वाला कोई नहीं है।
स्वास्थ्य सुपरवाइजर संघ के प्रधान राममेहर वर्मा ने डीसी को लिखे पत्र में बताया कि संघ की ओर से वर्ष 2020 से लगातार नगर परिषद को पत्र लिखे जा रहे हैं कि अस्पताल में बंदरों का आतंक है और आए दिन बंदर किसी न किसी को काट रहे हैं। इसके अलावा कार्यालयों के अंदर पहुंच कर भी नुकसान पहुंचा रहे हैं लेकिन इस समस्या पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया है।
अस्पताल परिसर में बंदरों की संख्या इतनी है कि इन्हें भगाना भी नामुमकिन है। अस्पताल परिसर में बंदरों को झूंड बैठे रहते हैं। अस्पताल में आने वाले मरीजों काटने से चूकते नहीं हैं। इसके कारण नागरिक अस्पताल में आने वाले मरीजों के साथ-साथ चिकित्सकों व स्वास्थ्यकर्मियों को भारी परेशानी का सामना करना पड रहा है।
बंदर नागरिक अस्पताल में दाखिल मरीजों के बिस्तर पर पहुंच कर मरीज को घायल कर चुके हैं और कई बार कमरों में घुस कर कंप्यूटर समेत नागरिक अस्पताल के रिकार्ड को नष्ट भी कर चुके हैं। राममेहर वर्मा ने बताया कि डीसी इस मामले में खुद संज्ञान लेते हुए नप अधिकारियों को आदेश दें कि अस्पताल में स्पेशल तौर पर बंदर पकड़ो अभियान चलाया जाए ताकि नागरिक अस्पताल में कार्य करने वाले चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी व आमजन अपने आपको सुरक्षित महसूस कर सकें।
24 मार्च के बाद नहीं आई बंदर पकड़ने वाली टीम
कई बार गुहार लगाने के बाद 24 मार्च को बंदर पकड़ने वाली टीम नागरिक अस्पताल आई थी। यहां 15 से 20 बंदर पकड़े गए। टीम सदस्य मनोज ने फिर से आने की बात कही थी लेकिन टीम दोबारा बंदर पकड़ने के लिए नहीं आई है। इस साल 23 फरवरी 2025 को 14 बंदर, तीन मार्च को आठ बंदर, पांच मार्च को चार बंदर नागरिक अस्पताल से पकड़े गए हैं।
02जेएनडी09,10, 11: नागरिक अस्पताल में बंदरों का आंतक। स्वास्थ्यकर्मी- फोटो : अधिवेशन में रवाना होने से पहले जानकारी देते व्यापार मंडल के सदस्य।