जींद। शहर के रिंग रोड प्रोजेक्ट को आखिरकार बड़ी मंजूरी मिल गई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के बाहर बाईपास, रिंग रोड और नेशनल हाईवे कनेक्टिविटी विकसित करने की मेगा योजना को मंजूरी दी है। इसमें जींद बाईपास और आउटर रिंग रोड भी शामिल है।
प्रदेश की इन प्रमुख सड़क परियोजनाओं पर करीब 9,700 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। हालांकि, जींद रिंग रोड की अलग परियोजना लागत का फाइनल एस्टीमेट अभी तैयार होना बाकी है। जींद के लिए यह मंजूरी इसलिए अहम है, क्योंकि करीब 10 साल से रिंग रोड की योजना फाइलों में घूम रही थी।
तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 11 दिसंबर 2016 को जींद में करीब साढ़े आठ किलोमीटर लंबे रिंग रोड की घोषणा की थी। प्रस्ताव था कि इसे नरवाना रोड से बरवाला रोड तक बनाया जाए और आगे रोहतक रोड के बाईपास से जोड़ा जाए। लेकिन घोषणा के बाद लंबे समय तक काम शुरू नहीं हुआ। निजी कंपनी को डीपीआर तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई, लेकिन कंपनी के काम छोड़ने से योजना अटक गई।
इन गांवों से गुजरेगा रिंग रोड
अब प्रस्तावित रिंग रोड नरवाना रोड से शुरू होकर जुलानी, राजपुरा, ईक्कस, किनाना, जलालपुर खुर्द व कलां समेत करीब 10 गांवों की सीमा को छूते हुए रोहतक रोड की तरफ जाएगा। शहर से निकलने वाली प्रमुख सड़कें भी इससे जुड़ेंगी। इससे वाहन चालकों को एक सड़क से दूसरी सड़क पर जाने के लिए शहर के भीतर प्रवेश नहीं करना पड़ेगा।
हांसी-बरवाला जाने वाले वाहन शहर से बाहर निकलेंगे
रिंग रोड का सबसे बड़ा फायदा जींद शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को मिलेगा। नरवाना, कैथल, बरवाला, हांसी, भिवानी और रोहतक की तरफ जाने वाले ऐसे वाहनों को, जिन्हें शहर में काम नहीं है, बाहर से ही आगे निकलने का रास्ता मिल जाएगा। खासकर भारी वाहनों की शहर के अंदर आवाजाही कम होने से मुख्य बाजारों और प्रमुख चौराहों पर जाम का दबाव घटेगा।
नितिन गडकरी के सामने भी उठा था मुद्दा
रिंग रोड को सिरे चढ़ाने के लिए विधानसभा उपाध्यक्ष डॉ. कृष्ण लाल मिड्ढा लगातार पैरवी करते रहे हैं। उन्होंने इस मुद्दे को मुख्यमंत्री के सामने उठाने के साथ केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के समक्ष भी रखा। केंद्रीय मंत्री ने तीन साल पहले सोनीपत में भी इसकी घोषणा की थी। मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद वर्षों से अटकी इस परियोजना के जमीन पर उतरने की उम्मीद मजबूत हुई है।
रिंग रोड बनने के बाद जींद केवल जाम से राहत पाने वाला शहर नहीं होगा, बल्कि आसपास के गांवों और प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण सड़क नेटवर्क भी विकसित होगा। सरकार की ओर से प्रदेश के एक लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के बाहर ऐसी सड़क परियोजनाओं को मंजूरी देने का उद्देश्य भी बेहतर आवागमन और शहरों को भारी यातायात के दबाव से राहत देना है। उनके लिए यह खुशी की बात है कि उनकी पैरवी से शहर को रिंग रोड मिला है।
कृष्ण मिड्ढा, डिप्टी स्पीकर, हरियाणा सरकार