नागरिक अस्पताल प्रशासन में अजीब कारनामे होते रहते हैं। अब विभाग ने मलेरिया विभाग में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए बजट की मांग कर डाली है, जबकि विभाग में पहले से ही कैमरे लगे हुए हैं। हां इतना जरूर है कि जो कैमरे लगे हैं वे काम नहीं कर रहे हैं। गत दिनोें जब मलेरिया कार्यालय के आईडीएसपी शाखा के कमरे में स्वास्थ्य कर्मचारी शराब पी रहे थे तो उस समय कैमरे काम नहीं कर रहे थे। इससे साफ है कि नागरिक अस्पताल में कैमरे लगवा तो लिए जाते हैं, लेकिन जब उनकी जरूरत पड़ती है तो वे काम नहीं करते या खराब हो जाते हैं।
स्वास्थ्य विभाग की तरफ से स्वास्थ्य निदेशालय को लिखे पत्र में कहा गया है कि मलेरिया विभाग व क्षय रोग विभाग के भवन में अभी तक सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। इन दोनों कार्यालयों की हर्बल पार्क के साथ दीवार लगती है, जिससे चोरी होने का खतरा है। इसलिए इन भवनों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए 60 हजार रुपये का बजट अलॉट किया जाए। वहीं इस मामले में मलेरिया के डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. पालेराम कटारिया ने कहा कि उन्होंने मलेरिया विभाग में कैमरे लगवाने के लिए कोई बजट नहीं मांगा। प्लानिंग विभाग की तरफ से बजट मांगा गया होगा, मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
नहीं मिली थी सीसीटीवी फुटेज
मलेरिया कार्यालय भवन के आईडीएसपी शाखा में पिछले दिनों स्वास्थ्य कर्मचारियों के शराब पीने का मामला सामने आया था। यहां लगे सीसीटीवी कैमरों को जब खंगाला गया तो वे खराब मिले। आज तक इन कैमरों की रिपोर्ट भी नहीं मिली है, जबकि फिर से कैमरे लगवाने के लिए बजट मांगा गया है। जब मलेरिया विभाग में पहले ही सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं तो फिर दोबारा कैमरों के लिए बजट मांगने का क्या औचित्य है।
मलेरिया विभाग में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए उनके विभाग की तरफ से कोई बजट नहीं मांगा गया है। हो सकता है प्लानिंग विभाग की तरफ से बजट मांगा गया हो।
डॉ. पालेराम कटारिया, डिप्टी सिविल सर्जन मलेरिया विभाग।
मलेरिया भवन के एक-दो कमरों में कैमरे लगे होंगे, अब पूरे भवन में लगवाने की बात होगी। पूरे मामले की जानकारी नहीं है। इस बारे में मलेरिया विभाग से पूछा जाएगा।
डॉ. मनजीत सिंह, सिविल सर्जन, जींद।