25जेएनडी12-आर्य समाज मंदिर राम नगर में आयोजित हवन में भाग लेते श्रद्धालु। स्रोत श्रद्धालु
जींद। आर्य जगत की आर्याशा दर्शनाचार्या ने कहा कि वेद ईश्वरीय वाणी है और हमें सदैव वेद के उपदेश के अनुसार ही आचरण करना चाहिए। वेद के अनुसार जीवन जीने से व्यक्ति जीवन के उच्च शिखर को प्राप्त कर लेता है और समाज में सम्मान पाता है। वे आर्य समाज मंदिर राम नगर की ओर से आयोजित तीन दिवसीय वैदिक सत्संग समारोह के पहले दिन उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थी।
उन्होंने कहा कि सभी समस्याओं का समाधान ईश्वरीय वाणी वेद ज्ञान के प्रचार-प्रसार तथा उसके अनुकूल लोगों और समाज के आचरण से ही संभव है। वेदों में मानव के जीवन के उत्थान का प्रत्येक सूत्र विद्यमान है। वेद जीवन के रहस्यों को सुलझाने वाले वैज्ञानिक ग्रंथ हैं। उन्होंने आत्मा की आवाज को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि हमें अपनी आत्मा की आवाज की अवहेलना नहीं करनी चाहिए। वास्तव में ये परमपिता परमेश्वर का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि ईश्वर को जाने बिना जीवन व्यर्थ है और ईश्वर के सही स्वरूप को जाने बिना उसकी पूजा निरर्थक है। यदि हम आनंद को प्राप्त करना चाहते हैं और सदा के लिए दुखों से छुटकारा पाना चाहते है तो ईश्वर के सही स्वरूप को समझकर सही तरीके से पूजा करनी चाहिए। इस अवसर पर कार्यक्रम के संयोजक यज्ञवीर आर्य, प्रधान कंवर आर्य, अजीत आर्य, हरिलाल आर्य, कर्ण सिंह आर्य, सत्यनारायण आर्य, अजीत गौतम, शमशेर आर्य, हरिलाल आर्य भी मौजूद रहे।