अदालत के आदेश पर शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने के अभियान पर ब्रेक लग गया है। पिछले करीब छह महीने पहले अदालत के आदेश पर मुख्य बाजार में अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू हुआ था, लेकिन यह अभियान एक बाजार से बाहर नहीं निकल पाया है। जिला प्रशासन को एक जनवरी तक अदालत में अतिक्रमण हटाकर इसकी रिपोर्ट अदालत को देनी है। शहर के मुख्य बाजार सहित पटियाला चौक, रेलवे रोड, भिवानी रोड, सफीदों रोड, हाऊसिंग बोर्ड कॉलोनी, अर्बन एस्टेट सहित तमाम शहर अतिक्रमण की गिरफ्त में है। शहर की शिव कॉलोनी और हाऊसिंग बोर्ड कॉलोनी में तो अतिक्रमण का आलम यह है कि 20 फुट की गली में आधे से भी अधिक अतिक्रमण हुआ है। ऐसे में यहां से दोपहिया वाहन निकालना भी मुश्किल हो जाता है। दरअसल नगर परिषद में शहर की सरकार का गठन होने के बाद अतिक्रमण हटाने का अभियान ढीला पड़ गया है। इसके बाद कई लोगों ने जिला अदालत से अतिक्रमण हटाने के खिलाफ स्टे भी लिए हैं, लेकिन इनके अलावा भी शहर में भर में अतिक्रमण बड़ी समस्या बनी हुई है।
बाजार की बदली तस्वीर
अब तक शहर में करीब 20 प्रतिशत तक अतिक्रमण हटाया गया है। इससे शहर में मेन बाजार शहर थाना से लेकर तांगा चौक तक का ही अतिक्रमण पूर्ण रूप से हटा है। यहां बाजार में दोनों ओर से अतिक्रमण हटने से करीब चार फुट तक गली चौड़ी हो गई हैं। वहीं तांगा चौक से भारत सिनेमा की तरफ के बाजार से अतिक्रमण राजनीतिक कारणों से नहीं हट पा रहा है।
ढीला पड़ा अभियान, अदालत में स्टे
नगर परिषद में शहर की सरकार का गठन होने के बाद अतिक्रमण हटाने का अभियान ढीला पड़ गया है। इसके बाद कई लोगों ने जिला अदालत से अतिक्रमण हटाने के खिलाफ स्टे भी लिए हैं, लेकिन इनके अलावा भी शहर में भर में अतिक्रमण बड़ी समस्या बनी हुई है।
दोबारा शुरू हुआ अतिक्रमण
बेशक प्रशासन ने अतिक्रमण हटा दिया है, लेकिन पुरानी अनाज मंडी, रोहतक रोड व हनुमान गली जैसी जगहों पर दोबारा से अतिक्रमण होना शुरू हो गया है। ऐसे में शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।
प्रशासन ने जिस गति से अभियान की शुरुआत की थी, उससे तो अतिक्रमण हट जाना चाहिए था, लेकिन कुछ लोगों ने अदालत में भी अतिक्रमण हटाने को चुनौती दी है। जिला अदालत में हाई कोर्ट के आदेश पर सुनवाई नहीं हो सकती, ऐसे में टीम अन्ना इस बार अदालत में अपना पक्ष रखेगी।
- सुनील वशिष्ठ, सदस्य अन्ना टीम।
शहर में अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया जारी है, अदालत में नगर परिषद को अतिक्रमण पर हलफनामा देना है। इससे पहले अतिक्रमण हटा दिया जाएगा।
- बीएन भारती, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद।