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जिले में ब्लैक फंगस का नहीं इलाज, ऑपरेशन करने के लिए ईएनटी ही नहीं

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जिले में फिलहाल कोई ब्लैक फंगस का मामला सामने नहीं आया है। यदि कोई मामला आ भी गया तो स्वास्थ्य विभाग के पास उससे निपटने की कोई दवा या इंजेक्शन नहीं है। ब्लैक फंगस का संक्रमण जब ज्यादा बढ़ जाता है तो ऑपरेशन करना पड़ता है। ऑपरेशन ईएनटी सर्जन को करना होता है। लेकिन जिले में कोई एईएनटी सर्जन नहीं है।
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प्रदेश में ब्लैक फंगस के 70 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। राज्य सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को इससे निपटने के लिए अलर्ट कर दिया है। नागरिक अस्पताल प्रशासन भी ब्लैक फंगस से निपटने के लिए तैयार हो गया है। लेकिन यहां पर इस संक्रमण से निपटने के लिए कोई दवा और ईएनटी सर्जन नहीं है। यदि प्रारंभिक तौर पर ब्लैक फंगस का पता चल जाए तो एंटीबायोटिक दवाओं से काम चल जाता है। यदि संक्रमण का देरी से पता चलता है तो फिर एम्फोटेरेसिन बी इंजेक्शन लगाना पड़ता है। इससे भी आराम नहीं मिलने पर मरीज का ऑपरेशन करना पड़ता है। फंगस को नाक के द्वारा बाहर निकाला जाता है। कोरोना से ठीक हुए मरीजों में इस प्रकार के मामले देखने को मिले हैं। जिले में किसी भी मेडिकल स्टोर पर एम्फोटेरेसिन बी इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है। वहीं ऑपरेशन करने के लिए ईएनटी सर्जन भी उपलब्ध नहीं है।
ब्लैक फंगस का जिले में फिलहाल कोई मामला सामने नहीं आया है। इससे निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से तैयार है। ब्लैक फंगस से निपटने के लिए दवाइयों की मांग स्वास्थ्य मुख्यालय को भेजी गई है। यदि किसी मरीज को ऑपरेशन की जरूरत होगी तो ऑपरेशन भी करवाया जाएगा।
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डॉ. गोपाल गोयल, एसएमओ, नागरिक अस्पताल।
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