अपने कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित करते बीरेंद्र सिंह।
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बृजेंद्र सिंह का टिकट किन कारणों से काटा गया है वह नहीं जानते हैं, लेकिन अब उन्होंने दोबारा कमर कस ली है। वह भूपेंद्र सिंह हुड्डा, रणदीप सुरजेवाला, कुमारी सैलजा और किरण चौधरी को एक साथ लाकर देश-प्रदेश में सत्ता परिवर्तन करेंगे। इतना ही नहीं चंडीगढ़ का रास्ता जींद से होकर जाता है, इसलिए सभी को तैयार रहना होगा। बीरेंद्र सिंह ने यह बात अपने समर्थकों के साथ बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में कही।
उन्होंने कहा कि बृजेंद्र सिंह हिसार से कांग्रेस पार्टी से टिकट के दावेदार थे। जब भाजपा में शामिल होने के लिए नेताओं में होड़ लगी थी तब बृजेंद्र सिंह ने भाजपा छोड़कर कांग्रेस का हाथ थामा। इससे कांग्रेस के पक्ष में माहौल बना। हिसार को लेकर पार्टी ने जो फैसला किया है अब सभी को उसके साथ खड़ा होना है। वह 10 साल भाजपा में रहे।
भाजपा में शामिल होने पर उन्होंने सोचा था कि कांग्रेस और भाजपा की विचारधारा में थोड़ा बहुत फर्क होगा। 10 साल में वह इस बात को जान गए कि कांग्रेस की सोच कमेरा, किसान, मजदूर और देश को मजबूत करने वाली है। यह भाजपा की सोच में नहीं है।
अगर छोटूराम के नाती और उनके बेटे किसान, मजदूर और कमेरे की बात नहीं कर सकते और उनकी लड़ाई नहीं लड़ सकते तो उन्हें राजनीति करने का अधिकार नहीं है। इसी कारण दोनों ने भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने का फैसला लिया। इस मौके पर पूर्व विधायक प्रेमलता, सज्जन श्योकंद, जय भगवान गोयल, शिवनारायण शर्मा, देवव्रत ढांडा, सोमबीर पहलवान, जसबीर कुंडू भी मौजूद रहे।
नाम लिए बिना बेटे को सीएम बनने का दिखाया सपना
एक सवाल के जवाब में बीरेंद्र सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के पिता रणबीर सिंह का जिक्र करते हुए कहा कि भूपेंद्र हुड्डा के बड़े भाई जोगिंदर के निधन पर बड़ी संख्या में नेता आए हुए थे। तब चौधरी रणबीर सिंह ने कहा था कि लोग कहते थे रणबीर सिंह कभी सीएम नहीं बन पाएगा। आज देखो मेरा बेटा प्रदेश का सीएम है। यह कहकर बीरेंद्र सिंह ने परोक्ष रूप से अपने बेटे बृजेंद्र सिंह को सीएम बनने का सपना दिखाया। बीरेंद्र सिंह ने कहा कि बृजेंद्र का लोकसभा टिकट कटना कोई बड़ा घटनाक्रम नहीं, यह केवल एक झटका है। उनके साथ तो इससे भी बड़े घटनाक्रम हो चुके हैं। अगर उनके नेता राजीव गांधी की आतंकवादियों ने हत्या नहीं की होती तो वह प्रदेश के मुख्यमंत्री होते। उन्हें कभी अपनों ने मुख्यमंत्री नहीं बनने दिया तो कभी कोई और टांग अड़ा गया।