वेतन वृद्धि सहित अन्य मांगों को लेकर जिले भर के सरकारी बैंकों के कर्मचारी और अधिकारी बुधवार को हड़ताल पर रहे। इससे जिले की 400 से अधिक शाखाओं में करीब 150 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ, वहीं करीब 70 करोड़ रुपये एक बैंक से दूसरे बैंक में और चेकों का क्लीयरेंस भी बाधित रहा। इससे पहले भी बैंक कर्मचारियों ने 12 नवंबर को हड़ताल की थी।
मांगों को लेकर बैंक कर्मचारी सुबह सफीदों गेट स्थित स्टेट बैंक ऑफ पटियाला की शाखा पर एकत्रित हुए और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इंडियन बैंक एसोसिएशन पर उनकी वेतन वृद्धि की मांगों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कर्मचारियों ने वेतन वृद्धि की मांग को सही ठहराया।
ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर एसोसिएशन के जिला प्रभारी रणवीर सिंह के अनुसार बैंक यूनियन और सरकार के बीच हर पांच साल में समझौता होता है। पिछली बार एक जनवरी 2012 को समझौता होना चाहिए था, लेकिन सरकार ने नहीं किया। ऐसे में यह समझौता दो साल की देरी से चल रहा है।
नवंबर माह में बैंक कर्मचारियों की मांग 25 प्रतिशत वेतन वृद्धि की थी और आईबीए के साथ बातचीत में बैंक कर्मचारी 23 प्रतिशत तक आ गए, लेकिन आईबीए 11 प्रतिशत से ऊपर नहीं बढ़ी। इसके अलावा आउट सोर्सिंग पर कर्मचारियों की भर्ती करने, बैंकों का विलय करने और निजी बैंकों को लाइसेंस देने के विरोध में भी हड़ताल रखी गई। इसके बाद एक दिसंबर को दोराबा से हुई बातचीत में भी एसोसिएशन अपने रुख पर अडिग रही है।
निजी बैंकों से चला काम
सार्वजनिक बैंकों की हड़ताल होने के कारण लोगों ने निजी बैंकों की शरण ली। इसके चलते निजी बैंकों में अन्य दिनों के मुकाबले अधिक भीड़ रही। विशेषकर पैसा जमा कराने वाले कारोबारियों ने हड़ताल के कारण निजी बैंकों में ही पैसे जमा करवाए।