संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। जलघर में वॉल्व खराब होने के कारण पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे बधाना गांव के लोगों का सब्र आखिर शनिवार को जवाब दे गया। गुस्साए ग्रामीणों ने सबह 11 बजे जलघर पर ताला जड़ दिया और विभाग के खिलाफ रोष जताया।
मामले की सूचना मिलते ही जलापूर्ति विभाग के जेई रोहित ने ग्रामीणों से फोन पर बातचीत कर जल्द समस्या के समाधान का आश्वासन दिया। इसके बाद करीब एक घंटे बाद ग्रामीणों ने जलघर का ताला खोला। ग्रामीण
ग्रामीण रामकरण, कुलवंत, बोबली, विकास और संदीप ने बताया कि गांव के जलघर में वॉल्व खराब होने से सात दिनों से पेयजल आपूर्ति ठप पड़ी है। घरों में पानी न पहुंचने से परेशान महिलाओं को दूर खेतों से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। कई बार विभागीय अधिकारियों से शिकायत की लेकिन हर बार सिर्फ यह कहकर टाल दिया गया कि ठेकेदार से इसे ठीक करवाया जाएगा।
अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि जलघर के नवीनीकरण पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद फिल्टर और वॉल्व जैसे जरूरी उपकरण खराब पड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारियों ने बिना काम कराए ही बिल पास कर दिए। ग्रामीणों ने कहा कि जब इतनी बड़ी रकम खर्च होने के बाद भी पानी नसीब नहीं हो रहा तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर पैसा गया कहां।
टंकियां भरी, फिर भी घरों तक नहीं पहुंच रहा पानी
ग्रामीणों के मुताबिक जलघर के दोनों टैंक पानी से लबालब भरे हुए हैं लेकिन फिल्टर खराब होने के कारण नहरी पानी की सप्लाई गांव तक नहीं पहुंच पा रही। जलघर में नहरी पानी की सप्लाई करने वाले फिल्टर काफी समय से खराब हैं। विभाग ने एक फिल्टर को किसी तरह चालू भी किया था लेकिन जींद नहर से पानी के साथ आने वाली मिट्टी के चलते वह भी बार-बार खराब हो जाता है। ग्रामीणों की मांग है कि जलघर के सभी फिल्टरों को एक साथ दुरुस्त किया जाए ताकि एक के खराब होने पर दूसरे से सप्लाई जारी रखी जा सके।
वॉल्व ठीक कर दी, फिल्टर भी जल्द होंगे दुरुस्त : जेई
जलापूर्ति विभाग के जेई रोहित ने बताया कि जलघर की वॉल्व ठीक कर दी गई है। फिल्टरों को भी जल्द दुरुस्त करवाया जाएगा ताकि एक फिल्टर खराब होने पर दूसरे से ग्रामीणों को नहरी पानी की सप्लाई दी जा सके। उन्होंने कहा कि ठेकेदार से भी इस संबंध में बात की जाएगी और ग्रामीणों की पेयजल समस्या का जल्द समाधान कराया जाएगा।
19जेएनडी13: जलघर को ताला लगाते हुए ग्रामीण। स्रोत: ग्रामीण