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Jind News: पितृ तर्पण को लेकर आषाढ़ अमावस्या शुभ

Fri, 13 Jun 2025 11:52 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
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13जेएनडी09-जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री।
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जींद। श्रद्धालुओं के लिए पितृ तर्पण को लेकर आषाढ़ अमावस्या बेहद खास रहेगी। आषाढ़ अमावस्या के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग में किया गया हर कार्य सफल सिद्ध माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार आषाढ़ अमावस्या के दिन स्नान और दान करते हैं। पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि करते हैं। इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
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पंचांग के अनुसार आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 24 जून मंगलवार को शाम 6:59 बजे से शुरू होगी। इस तिथि का समापन 25 जून बुधवार को शाम 4 बजे होगा। उदयातिथि के आधार पर आषाढ़ अमावस्या 25 जून बुधवार को रहेगी और उसी दिन दर्श अमावस्या भी है।
अमावस्या तिथि को पितरों को प्रसन्न करने के लिए शुभ माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और पितरों की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही पितरों का तर्पण और पिंडदान किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि पितरों का तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं। साधक को उनकी कृपा प्राप्त होती है।
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आषाढ़ अमावस्या के दिन पिंडारा तीर्थ पर दूरदराज से श्रद्धालु पहुंचेंगे और पितृ तर्पण करेंगे। पितृ दोष को दूर करने के लिए अमावस्या के दिन स्नानकर जल में काले तिल मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। ऐसा माना जाता है कि इस उपाय को करने से व्यक्ति को पितृ दोष की समस्या से छुटकारा मिलता है।



दान करने से मिलता है पितरों का आशीर्वाद : नवीन शास्त्री

जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने कहा कि आषाढ़ अमावस्या के दिन स्नान करने के बाद भगवान विष्णु और पितरों की पूजा-अर्चना करें। साथ ही पितरों को अर्घ्य दें। इसके बाद कपड़े, धन, अन्न समेत आदि चीजों का दान करें। आषाढ़ अमावस्या के दिन दान करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। वहीं सुख-समृद्धि में वृद्धि के लिए आषाढ़ अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की पूजा-अर्चना करें। साथ ही सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
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