संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। जिले में लगातार वायु प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। वायु प्रदूषण को रोकने के लिए प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। पिछले वर्ष सड़कों से उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए पानी का छिड़काव किया जा रहा था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ है। शहर में कई स्थानों पर निर्माण कार्य भी धड़ल्ले से चल रहे हैं। रात को नगर परिषद की मशीन भी सड़कों की सफाई करती देखी जा सकती है, जिससे धूल के गुब्बार उड़ते नजर आते हैं। चिकित्सकों ने लोगों को सुबह व शाम की सैर करने से परहेज करने को कहा है।
शु्क्रवार को एक्यूआई 403 तक पहुंच गया था, जबकि शनिवार को यह 424 तक पहुंच गया। दोपहर को एक्यूआई सबसे ज्यादा होता है। शाम को वायु प्रदूषण से कुछ राहत मिली और एक्यूआई 380 तक पहुंच गया। लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण सबसे ज्यादा श्वास के रोगियों को भारी परेशानी होती है। जो लोग पहले ही सांस की बीमारियों से जूझ रहे हैं, उनके लिए खुली हवा में सांस लेना मुश्किल हो रहा है। खासकर बुजुर्गों व बच्चों की सेहत पर इस वायु प्रदूषण का काफी विपरीत प्रभाव पड़ता है। शहर में खुलेआम कूड़े के ढेरों में आग लगाई जा रही है। इसके अलावा निर्माण कार्य भी चल रहे हैं।
इस समय वायु प्रदूषण इतना अधिक है कि वह स्वास्थ्य को खराब कर सकता है। जो लोग पहले ही किसी बीमारी से जूझ रहे हैं, उनको घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। सुबह व शाम की सैर भी लोगों को नहीं करनी चाहिए। मुंह पर मास्क लगाकर ही लोगों को बाहर निकलना चाहिए। अस्पताल में सांस के रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
डॉ. राजेश भोला, डिप्टी एमएस
लोगों को कूड़े में आग नहीं लगानी चाहिए। किसानों को भी पराली नहीं जलाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। जो लोग पराली जला रहे हैं, उन पर जुर्माना लगाया जा रहा है। हर किसी को वायु प्रदूषण को कम करने के प्रयास करने चाहिए। यदि दूसरों की सेहत बचेगी, तभी खुद की सेहत बचेगी। सड़कों पर पानी का छिड़काव करवाया जाएगा।
मोहम्मद इमरान रजा, डीसी।