पदक जीतने के बाद खुशी का इजहार करतीं अंशु मलिक।
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जींद। सर्बिया के बेलग्रेड में चल रही कुश्ती विश्व कप प्रतियोगिता में जींद के निडानी गांव की अंतरराष्ट्रीय पहलवान अंशु मलिक को 57 किलोग्राम भारवर्ग के फाइनल मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा। उन्हें मेसिडोनिया की पहलवान अनास्तासिया निचिता ने 5-1 से पराजित किया। इसके साथ ही उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। हालांकि मौजूदा विश्वकप में 19 वर्षीय अंशु मलिक रजत पदक जीतने वाली वह पहली भारतीय बन गई हैं।
सीनियर वर्ग के मुकाबले की शुरुआत अंशु ने काफी आक्रामक तरीके से की, शुरुआती मिनट में वह टेकडाउन लेने में सफल रहीं लेकिन उनकी विरोधी काफी चालाक थीं और जल्द ही उन्होंने अपने डिफेंस से अंशु के प्लान को फेल कर दिया। फ्री स्टाइल के मुकाबले में अंशु मलिक ने पहला मुकाबला क्वालीफाइंग राउंड में अजरबेजान की पहलवान एलोना कोलेनिस को 4-2 से हराया। क्वार्टर फाइनल में अंशु मलिक ने जर्मनी की पहलवान लोरा मर्टेंट को 3-1 अंक से पराजित किया। उन्होंने रूसी पहलवान वेरोनिका चुमिकोवा को 7-4 से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। फाइनल मुकाबले में उन्हें 5-1 से हार का सामना करना पड़ा। प्रतियोगिता 18 दिसंबर तक चलेगी।
एयरपोर्ट पर ही मंगवाए आलू के पराठे
अंशु मलिक की फ्लाइट वीरवार रात एक बजे दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचेंगी। अंशु मलिक ने घर से एयरपोर्ट पर ही मां के हाथ के बने आलू के पराठे मंगवाए हैं। अंशु मलिक के पिता धर्मबीर मलिक के अनुसार वहीं आलू के पराठे लेकर पहुंचेंगे।
पिता-चाचा भी रह चुके हैं अंतरराष्ट्रीय पहलवान
अंशु मलिक के पिता धर्मबीर मलिक व चाचा पवन मलिक दोनों ही अंतरराष्ट्रीय पहलवान रह चुके हैं। धर्मबीर मलिक ने खुद अंशु को तैयार किया है। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता से पहले से वह कोच जगदीश श्योराण व खेल स्कूल निडानी के दलीप सिंह मलिक की देखरेख में अभ्यास कर रही है।