जींद। अलेवा गांव की अनिता ने सपनों को हकीकत में बदलने के लिए हर चुनौती को अवसर बनाकर आगे कदम बढ़ाया। कभी चूल्हा-चौका संभालने तक सीमित मानी जाने वाली महिलाओं की सोच को अपने जुनून से तोड़ा। आज वह खुद अपने पैरों पर खड़े होने के साथ 300 से अधिक लड़कियों को मेकअप व ब्यूटी ट्रेनिंग दे रही हैं।
अनिता ने बताया कि एक साधारण परिवार से होने के कारण बचपन से ही आर्थिक चुनौतियां उनके सामने रही। 12वीं के बाद उन्होंने ब्यूटी पार्लर में कॅरिअर बनाने का फैसला लिया और प्रशिक्षण पूरा कर लिया। करीब 15 वर्ष पहले अलेवा गांव में उनकी शादी हुई तो घरवालों के दबाव में उन्हें यह काम छोड़कर निजी स्कूल में पढ़ाना पड़ा।
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धीरे-धीरे उनकी लगन और हुनर ने परिवार की सोच बदली। इसके बाद परिस्थितियां बदली और पति ने दोबारा कॅरिअर शुरू करने के लिए प्रेरित किया। अब तक उन्होंने लगभग 300 जरूरतमंद लड़कियों को निशुल्क ट्रेनिंग दी है। उनके पास वर्तमान में भी महिलाएं प्रशिक्षण ले रही हैं।
पति की मदद से चढ़ी सफलता की सीढ़ी
अनिता बताती हैं कि शुरुआत कठिन थी। पति ने उनकी पढ़ाई पूरी करवाने में मदद की और प्रोत्साहित किया। आज वही लोग जो पहले ताने देते थे उनके काम की सराहना करते हैं।सफलता की शुरुआत अपनी रुचि और हुनर को पहचानने से होती है। वह ग्रामीण महिलाओं और लड़कियों को वह निशुल्क प्रशिक्षण देने के साथ डिप्लोमा भी दिलवाती हैं। शादियों में जरूरतमंद लड़कियों का मेकअप वह केवल उत्पाद खर्च पर कर देती हैं।