26जेएनडी19: जयंती देवी मंदिर जहां नवरात्रों के दिनों में भक्ति रस की धारा बहेगी । पुजारी
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जींद। चैत्र नवरात्रों में जींद के महाभारत कालीन जयंती देवी मंदिर में प्रतिदिन हवन, भजन संध्या, भव्य आरती और भंडारा लगाया जाएगा। मंदिर में 30 मार्च से छह अप्रैल के दौरान प्रतिदिन अलग-अलग भक्ति के गीत श्रद्धालुओं को सुनने को मिलेंगे।
मंदिर पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि 30 मार्च को सुबह 8 बजे हवन यज्ञ और 9 बजे कन्या पूजन होगा। नवरात्रों में प्रतिदिन शाम को मां जयंती हवन यज्ञ होगा। तीन अप्रैल को छठ पर मां जयंती का भव्य जागरण होगा और चार अप्रैल को सप्तमी पर मेला लगेगा। भजन संध्या और जागरण में मां की भेंट गाने के लिए देश-प्रदेश से कलाकार पहुंचेगें। मेले में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए व्यवस्था की पूरी तैयारी कर ली गई है। मेले के दौर महा आरती होगी और प्रसाद का वितरण चलता रहेगा। श्रद्धालु स्वयं व्यवस्था को संभालने का काम करेगें। इसके साथ-साथ पुलिस का भी सहयोग लिया जाएगा, ताकि कोई धर्म के रंग में भंग न डाल दे। जयंती देवी जींद शहर की इष्ट देवी है। इसलिए मां की कृपया पाने के लिए पूरा शहर पूजा अर्चना करने के लिए मंदिर आता है। जींद शहर के लोग जो देश-विदेशो में अलग-अलग स्थानों पर रहते हैं। वह भी मां जयंती की मेहर पाने के लिए सप्तमी मेले में आते हैं।
रामनवमी पर कन्या पूजन व भंडारे का होगा आयोजन
नवरात्रों को लेकर मंदिर को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन सर्वार्थ सिद्धि और अमृत योग रहेगा। वैदिक ज्योतिष में इन योगों में पूजा बहुत ही शुभ फलदायी होती है। प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना के साथ ही नवरात्रि पर्व पर देवी दुर्गा की आराधना का महापर्व शुरू होता है। हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व होता है। एक वर्ष में कुल चार नवरात्रि आती है, पहला चैत्र नवरात्रि, दूसरा शारदीय नवरात्रि और दो गुप्त नवरात्रि।
वर्जन
हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्रि आरंभ हो जाती है। चैत्र नवरात्रि के शुभारंभ होने के साथ ही नया हिंदू वर्ष भी आरंभ होता है। चैत्र नवरात्रि पर लगातार नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना और मंत्रोचार किया जाता है। उन्होंने कहा कि नवरात्रि पर देवी दुर्गा पृथ्वी लोक आती है और अपने सभी भक्तों की हर एक मनोकामना को पूर्ण करती हैं।
नवीन शास्त्री पुजारी जयंती देवी मंदिर