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अत्याचार के बीच मानवता और धर्म की रक्षा के लिए दी कुर्बानी : मिड्ढा

Tue, 11 Nov 2025 11:42 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
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11जेएनडी26-सीआरएसयू में आयोजित हिंद की चादर लाइट एंड साउंड शो में पहुंचे डिप्टी स्पीकर डॉ. कृष्
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जींद। डिप्टी स्पीकर डाॅ. कृष्ण लाल मिड्ढा ने कहा कि गुरु तेग बहादुर ने अपने शीश की कुर्बानी देकर मानवता व धर्म की स्वतंत्रता की रक्षा की थी। यह उस समय की बात है जब जुल्म, अत्याचार और भय हर ओर फैल चुका था। लोग अपने धर्म की आजादी के लिए तरस रहे थे। डाॅ. कृष्णलाल मिड्ढा मंगलवार को श्रीगुरु तेग बहादुर की 350वीं शहीदी वर्षगांठ के उपलक्ष्य में हिंद की चादर लाइट एंड साउंड शो पर सीआरएसयू के डॉ. हरिचंद मिड्ढा ऑडिटोरियम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। इस दौरान डीसी मोहम्मद इमरान रजा, जुलाना के एसडीएम होशियार सिंह, सीआरएसयू की रजिस्ट्रार लवलीन मोहन मौजूद रहे।
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डिप्टी स्पीकर ने कहा कि गुरुजी ने धर्म, मानवता और राष्ट्र की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनका बलिदान राष्ट्र की अस्मिता और एकता का प्रतीक है। गुरुजी की शिक्षा केवल इतिहास की किताब नहीं, बल्कि भविष्य का जीवंत ब्लूप्रिंट है, जो आने वाली पीढ़ियों को मार्गदर्शन देता रहेगा। इस अवसर पर प्रस्तुत की गई रंगारंग सांस्कृतिक झलकियों के माध्यम से गुरु तेग बहादुर जी के त्याग, शौर्य और मानवीय मूल्यों का संदेश जन-जन तक पहुंचाया गया।
लाइट एंड साउंड के माध्यम से उनके जीवन वृतांत को इस तरह संजोया गया मानो सभी दृश्य प्रत्यक्ष रूप से सजीव हो उठे हों। डॉ. मिड्ढा ने कहा कि एक नवंबर से गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहीदी वर्षगांठ के उपलक्ष्य में विशेष कार्यक्रमों की श्रृंखला आरंभ की गई है जिनका राज्य स्तरीय मुख्य आयोजन 25 नवंबर को कुरुक्षेत्र में किया जाएगा। गुरु तेग बहादुर को हिंद की चादर इसलिए कहा गया, क्योंकि वे केवल सिख धर्म के नहीं बल्कि पूरे भारत की अस्मिता की ढाल बन गए थे। दिल्ली के चांदनी चैक में जब उन्होंने अपना शीश बलिदान किया तो वह सिर्फ अपने लिए नहीं बल्कि संपूर्ण मानव जाति की आजादी के लिए किया था।
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उनका संदेश था निडर बनो, डर से मुक्त रहो, और सच्चाई के मार्ग पर चलो, ऐसे संदेश को हमें आत्मसात करना चाहिए। गुरुजी की शिक्षाएं केवल सिख इतिहास तक सीमित नहीं हैं। वे हमें इंसानियत का मार्ग दिखाती हैं। वे सिखाते हैं कि धर्म की रक्षा का अर्थ केवल अपने धर्म की रक्षा नहीं बल्कि दूसरों के अधिकारों की रक्षा करना भी है।
आज जब हम इस ऑडिटोरियम में गुरु तेग बहादुर का 350 वां शहीदी दिवस मना रहे हैं, तो यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चेतना का पर्व है। हरियाणा की धरती सदैव वीरता की भूमि रही है।
यह धरती सिख परंपरा, किसान की मेहनत और समाज की एकता की मिसाल रही है। इस अवसर पर सरदार करनैल सिंह निम्नाबाद, गुरजिंद्र सिंह, बीबी परमिंद्र कौर, जोगेंद्र सिंह पाहवा, मालक सिंह चिम्हा, गुरविंद्र सिंह, यादवेंद्र सिंह, मलकियत सिंह, शमशेर सिंह मौजूद रहे।
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