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Jind News: चैत्र नवरात्र में अमृत सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि का अद्भुत संयोग

Tue, 25 Mar 2025 12:06 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
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24जेएनडी15: जयंती देवी मंदिर में मां जयंती की मूर्ति की सफाई करते हुए। पुजारी
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जींद। हिंदू धर्म में चैत्र व शारदीय नवरात्र का विशेष महत्व है। श्रद्धालु नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु माता दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की नौ दिनों तक पूजा-अर्चना करते हैं और फिर कंजक पूजन कर अपना व्रत खोलते हैं। इस बार चैत्र नवरात्र 30 मार्च से शुरू हो रहे हैं और श्रद्धालुओं के लिए बेहद खास रहने वाले हैं।
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इस वर्ष चैत्र नवरात्रि में अमृत सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि योग का अद्भुत संयोग बनेगा। नवरात्रि के पहले दिन इंद्र योग और रेवती नक्षत्र का संयोग भी रहेगा। श्रद्धालु नवनात्र पर्व की तैयारियों को लेकर जुटे हैं। फिर मंदिर परिसरों में मंदिरों की सफाई व साज-सज्जा का कार्य किया जा रहा है। नवरात्र के पहले दिन दुर्लभ इंद्र योग का निर्माण हो रहा है। इंद्र योग संध्याकाल 05 बजकर 45 मिनट तक है। इसके साथ ही संध्याकाल 04 बजकर 35 मिनट से सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। इंद्र योग में देवी मां दुर्गा की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होगी। साथ ही जीवन में सुखों का आगमन होगा।

श्रद्धालु घट स्थापना करेंगे 30 मार्च को
चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत शनिवार 29 मार्च को शाम 04 बजकर 27 मिनट पर शुरू होगी। वहीं 30 मार्च को प्रतिपदा तिथि दोपहर 12 बजकर 49 मिनट पर समाप्त होगी। सनातन धर्म में उदया तिथि मान्य है। इसके लिए श्रद्धालु 30 मार्च को घट स्थापना करेंगे और चैत्र नवरात्र की शुरुआत होगी।
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चैत्र नवरात्र को लेकर मंदिर परिसर में सफाई कार्य शुरू हो गया है। शहर के मध्य स्थित ऐतिहासिक जयंती देवी मंदिर में मूर्तियों की साफ-सफाई की जा रही है। सबसे ज्यादा श्रद्धालु इसी मंदिर में पूजा अर्चना के लिए आते हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं को चैत्र नवरात्र के दौरान पूजा अर्चना में किसी तरह की कोई परेशानी न हो, इसका प्रबंध किया जा रहा है। बैरिकेडिंग व वॉलंटियर्स की डयूटी नवरात्र के दौरान लगाई जाएगी।
वर्जन
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 30 मार्च को घटस्थापना समय सुबह 06 बजकर 13 मिनट से लेकर 10 बजकर 22 मिनट तक है। इस समय में स्नान, ध्यान कर कलश स्थापना कर सकते हैं। इसके बाद अभिजीत मुहूर्त 12 बजकर 01 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 50 मिनट के मध्य भी कलश स्थापना कर सकते हैं। इन दो शुभ योग में घटस्थापना कर सकते हैं। शुभ समय में कलश स्थापना करने से साधक को शुभ फल मिलता है। वही अमावस्या तिथि और रात के समय में कलश स्थापना नही करनी चाहिए। जगत जननी मां दुर्गा अपने भक्तों पर अपनी कृपा सदैव बरसाती हैं।
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नवीन शास्त्री, पुजारी जयंती देवी मंदिर
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