जींद। शिवभक्त 72 वर्ष बाद इस बार महाशिवरात्रि पर बेहद खास संयोग में भगवान आशुतोष की पूजा-अर्चना करेंगे। इस बार महाशिवरात्रि पर्व पर शिव योग, सिद्धि योग और चतुर्ग्रही योग बन रहा है। इन तीनों योग का एक ही दिन बनना अद्भुत है। इसके अतिरिक्त महाशिवरात्रि के दिन ही शुक्र प्रदोष व्रत बन रहा है। इस साल महाशिवरात्रि 8 मार्च को है। इस दिन प्रदोष व्रत भी रखा जाएगा। प्रदोष व्रत जब शुक्रवार के दिन बनता है तो उसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है।
जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि महाशिवरात्रि की शुरुआत 8 मार्च शाम 9 बजकर 57 मिनट पर होगी और अगले दिन 9 मार्च को सुबह 6 बजकर 17 मिनट पर समाप्त होगी। शिवजी की पूजा प्रदोष काल में की जाती है, इसलिए इस बार 8 मार्च को ही महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। इस दिन शाम 6 बजकर 25 मिनट से लेकर 9 बजकर 28 मिनट तक पूजा का शुभ मुहूर्त है। इसके अलावा महाशिवरात्रि की पूजा चार प्रहर में की जा सकती है। प्रथम प्रहर में भगवान शिव का दूध से अभिषेक किया जा सकता है। दूसरे प्रहर में दही, तीसरे प्रहर में शुद्ध देसी घी और चौथे प्रहर में शहद से अभिषेक किया जा सकता है। महाशिवरात्रि के दिन शिव स्तुति, शिव मंत्र, शिव सहस्रनाम, शिव चालीसा, शिव तांडव, रुद्राष्टक, शिव पुराण और शिव आरती गाना अत्यधिक फलदायी माना गया है। कहते हैं ऐसा करने पर महादेव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्त की हर मनोकामना पूरी करते हैं। इस दिन कुंवारी कन्याएं भगवान शिव के लिए व्रत रखती हैं तो उन्हें अच्छे वर की प्राप्ति होती है। वहीं शादीशुदा महिलाएं और पुरुष जीवन को सुखमय बनाने के लिए शिव-पार्वती की पूजा करते हैं।
अभिषेक के लाभ
नवीन शास्त्री ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही सभी दुखों का नाश होता है। शिवरात्रि के दिन शिवलिंग का शहद से अभिषेक करने से व्यक्ति को धन लाभ होता है। शिवरात्रि पर शिवलिंग पर घी अर्पित करने से वंश की वृद्धि होती है। बेलपत्र को शिवजी की पूजा में जरूरी माना गया है। ऐसे में शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते हैं तो इससे व्यक्ति के भाग्य में वृद्धि होती है। वहीं शिवजी को शमी के पत्ते, बेला के फूल, हरसिंगार के फूल चढ़ाने से भी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।