05जेएनडी18-स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बैठक लेते एडीसी डॉ. हरीश वशिष्ठ। स्वयं
जींद। बाल्यावस्था से ही बच्चों को नशे के खिलाफ जागरूक करना होगा, क्योंकि जन चेतना लाकर ही समाज में नशा जैसी बुराई को खत्म किया जा सकता है। शिक्षण संस्थाओं में भी बच्चों को नशे के दुष्प्रभाव के बारे में बताएं, ताकि वे दूसरे बच्चों को भी जागरूक कर सकें। एडीसी डॉ. हरीश वशिष्ठ ने यह निर्देश सोमवार को लघु सचिवालय स्थित सभागार में स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बैठक में दिए।
एडीसी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे माह में एक बार जिले में पड़ने वाले सभी नशा मुक्ति केंद्रों का निरीक्षण करें। केंद्र में आए नशा छोड़ने वाले युवाओं को दी जाने वाली सुविधा और दवा की जांच करें। चूंकि नशे की रोकथाम को लेकर सरकार और प्रशासन काफी गंभीर है। नशा युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले सकता है। ऐसे में बाल्यावस्था में ही बच्चों को नशे के गलत प्रभावों को लेकर जागरूक कर दिया जाए तो क्षेत्र से नशे को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है। बच्चों को नशे से बचाने के लिए स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के बदलते व्यवहार की ओर विशेष ध्यान दिया जाए। बच्चे स्कूल में ज्यादा समय बिताते हैं। ऐसे में स्कूल परिसर में बच्चों के बदलते व्यवहार पर ज्यादा नजर रखी जा सकती है। एडीसी ने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों का घर पर भी ध्यान रखें। उन्हें किसी न किसी खेल में अवश्य भाग दिलवाएं, ताकि उनका शरीर स्वस्थ व हृष्ट-पुष्ट बने। वे नशे से दूर रहें। उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार नागरिक होने के कारण हमारा नैतिक कर्तव्य है कि हम सब अपने आस-पास रहने वाले लोगों को भी नशे के दुष्प्रभाव के बारे में बताएं। इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. गोपाल गोयल, जिला शिक्षा अधिकारी विजय लक्ष्मी, उप सिविल सर्जन डॉ. रमेश पांचाल, डॉ. संकल्प मौजूद रहे।
05जेएनडी18-स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बैठक लेते एडीसी डॉ. हरीश वशिष्ठ। स्वयं